अंकित गुप्ता

अंकित गुप्ता
पिछले साल पेश बजट 2021 (Union Budget 2022) में वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) ने कई बड़े रिफॉर्म्स के कदम उठाए थे। इस बार भी बजट (Budget 2022) से बहुत उम्मीदें हैं। खासकर वित्तमंत्री बॉन्ड मार्केट (Bond Market) के लिए बड़े ऐलान कर सकती हैं। बॉन्ड सेक्टर में बोल्ड रिफॉर्म्स के लिए यह सही वक्त है। मेरा मानना है कि बॉन्ड मार्केट में रिटेल इन्वेस्टर्स की हिस्सेदारी बढ़ाने से इस सेक्टर में गहराई आएगी। इसके अलावा भी बजट में बॉन्ड के लिए कई बड़े कदम उठाने की जरूरत है।
अभी बॉन्ड मार्केट में आम निवेशकों (Retail Investors) की हिस्सेदारी बहुत कम है। इसे बढ़ाने की जरूरत है। वित्तमंत्री रिटेल इन्वेस्टर्स को बॉन्ड मार्केट में ऑनलाइन इन्वेस्ट करने के लिए प्रोसेस को आसान बनाने का ऐलान कर सकती हैं। इनकम टैक्स एक्ट, 1961 के सेक्शन 80सी के तहत गवर्नमेंट बॉन्ड और AAA रेटिंग वाली सिक्योरिटीज को शामिल किया जा सकता है। इससे आम आदमी की पहुंच बॉन्ड तक होगी।
ज्यादा क्रेडिट रेटिंग वाली डेट सिक्योरिटीज के लिए टैक्स के नियमों को आसान बनाने की जरूरत है। अभी बॉन्ड्स की बिक्री से होने वाले कैपिटल गेंस पर 'इनकम फ्रॉम कैपिटल गेंस' के तहत टैक्स लगाया जाता है। हालांकि, इन बॉन्ड्स से होने वाली इंट्रेस्ट इनकम को टैक्सपेयर की नेट इनकम ट्रीट किया जाता है। फिर, उसके टैक्स स्लैब के हिसाब से इस पर टैक्स लगता है। इससे टैक्स की दर बढ़कर 33 फीसदी तक पहुंच जाती है। इस वजह से रिटेल इन्वेस्टर्स बॉन्ड में इन्वेस्ट करने कतराते हैं।
मेरा मानना है कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को डेट म्यूचुअल फंड की तर्ज पर बॉन्ड के लिए भी टैक्स के नियम को आसान बनाना चाहिए। ऐसा करने से लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस के लिहाज से बॉन्ड पर टैक्स की दर घटकर 10 फीसदी पर आ जाएगी। गवर्नमेंट बॉन्डस और AAA रेटेड बॉन्ड्स को इस टैक्स स्ट्रक्चर के तहत लाया जा सकता है। मैं वित्तमंत्री से जीरो और डीप डिस्काउंट बॉन्ड्स पर भी फोकस करने की गुजारिश करूंगा। सरकार को टैक्स-फ्री बॉन्ड्स जारी करने पर भी ध्यान देना होगा। इससे सरकार को सस्ती दर पैसा जुटाने का मौका मिलेगा। साथ ही इन्वेस्टर्स को ज्यादा यील्ड कमाने का विकल्प भी मिलेगा।
यह देखा गया है कि ज्यादातर इन्वेस्टर्स को डेट इंस्ट्रूमेंट्स यानी बॉन्ड के बारे में पर्याप्त जानकारी नहीं है। इससे वे बॉन्ड में निवेश करने से बचते हैं। वे बैंकों की फिक्स्ड डिपॉजिट स्कीम में पैसा रखना पसंद करते हैं। वित्त मंत्री इस बजट में बॉन्ड मार्केट के बारे में जाकरूकता बढ़ाने के लिए उपायों का ऐलान कर सकती हैं। रिटेल इन्वेस्टर्स को डेट मार्केट और इसकी खूबियों के बारे में बताने से काफी फायदा हो सकता है।
मेरा मानना है कि वित्त मंत्री को एक कॉमन डिपॉजिटरी का ऐलान करना चाहिए। इसमें सभी तरह की सिक्योरिटीज को रखने की इजाजत दी जा सकती है। अभी कॉर्पोरेट बॉन्डस एनएसडीएल या सीडीसीएल डिपॉजिटरी में रखे जाते हैं, जबकि सरकारी बॉन्ड एसजीएल अकाउंट में रखे जाते हैं। एसजीएल (SGL) का मतलब सब्सिडियरी जनरल लेजर अकाउंट है। इस अकाउंट को रिजर्व बैंक (RBI) के पास ओपन किया जाता है। गवर्नमेंट बॉन्ड में ट्रेडिंग के लिए फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस इस अकाउंट को ओपन करते हैं।
अंकित गुप्ता बॉन्ड्सइंडिया डॉट कॉम के को-फाउंडर हैं।
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