Budget 2022 : डिजिटल पेमेंट इंडस्ट्री ने केंद्र सरकार से आगामी आम बजट (Union Budget) में यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) और रूपे डेबिट कार्ड्स (Rupay debit cards) के लिए जीरो एमडीआर व्यवस्था को वापस लेने का अनुरोध किया है। पेमेंट्स काउंसिल ऑफ इंडिया (पीसीआई) ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। सरकार ने जनवरी, 2020 से यूपीआई और रूपे ट्रांजैक्शंस पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) खत्म कर दिया था।
डिजिटल पेमेंट पर लगने वाला शुल्क है एमडीआर
प्वाइंट ऑफ सेल टर्मिनल (point-of-sale terminal) से किसी डिजिटल ट्रांजैक्शन के प्रतिशत के रूप में व्यक्त किया जाने वाला एमडीआर मर्चैंट द्वारा एक बैंक, कार्ड नेटवर्क और ऑफलाइन ट्रांजैक्शन के लिए पीओएस प्रोवाइडर और ऑनलाइन खरीद के लिए पेमेंट गेटवे को भुगतान किया जाता है। यहां पर मर्चैंट का मतलब दुकानों से हैं, जहां एक कस्टमर गुड्स का भुगतान करने के लिए एक कार्ड स्वाइप कराता है और कार्ड नेटवर्क वीजा, मास्टरकार्ड और रूपे जैसी कंपनियां हैं।
इंडस्ट्री को बने रहने में मिलेगी मदद
पीसीआई ने एक बयान में कहा, “केंद्र सरकार और आरबीआई ने देश में डिजिटल पेमेंट के विकास में अहम भूमिका निभाई है, जिससे देश लेस-कैश सोसायटी के लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है। इंडस्ट्री बैंकों को रिम्बर्श करने के लिए 1,300 करोड़ रुपये का इंसेंटिव देने की सराहना करती है, जो सरकार के डिजिटल इंडिया के लक्ष्य को हासिल करने के लिए सरकार का अहम कदम है और इससे इंडस्ट्री को बने रहने में मदद मिलेगी।”
इंडस्ट्री ने मांगा 4,000 करोड़ का इंसेंटिव
इंडस्ट्री को यूपीआई और रूपे एमडीआर जीरो किए जाने से 5,500 करोड़ रुपये का नुकसान होने का अनुमान है। इसमें कहा गया कि जीरो एमडीआर के साथ सरकार ने इन पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स (पीएसपी) की निवेश करने और फाइनेंसियल इन्फ्रास्ट्रक्चर को बनाए रखने की क्षमता को छीन लिया है।
पीसीआई ने कहा कि उसने वित्त मंत्रालय से यूपीआई और रूपे डेबिट के लिए जीरो एमडीआर व्यवस्था वापस लेने या इंडस्ट्री को 4,000 करोड़ रुपये का प्रोत्साहन देने का अनुरोध किया है।