Wright Research की सोनम श्रीवास्तव ने मनीकंट्रोल से बाजार की आगे की दशा-दिशा और यूनियन बजट 2022 पर बात करते हुए कहा कि इकोनॉमी देश और दुनिया से जुड़ी तमाम खबरों जैसे फेड की टेपरिंग, महंगे वैल्यूएशन और ओमीक्रॉन के प्रभाव को बाजार पचा चुका है। भारत की इकोनॉमी की स्थिति अच्छी है। इसके अलावा अच्छे संकेतों के साथ इसमें और सुधार होता नजर आ रहा है।
अगामी यूनियन बजट पर बात करते हुए सोनम श्रीवास्तव ने कहा कि 1 फरवरी को आनेवाले यूनियन बजट में सरकार यूपी और पंजाब में होने वाले चुनाव को ध्यान में रखते हुए एग्री स्ट्रक्चर के लिए इंसेटिव का एलान कर सकती है।
गौरतलब है कि बाजार अपने हाल के बॉटम से अब तक करीब 9 फीसदी भाग चुका है। जब सोनम श्रीवास्तव से पूछा गया कि क्या इस तेजी को प्री-बजट या प्री-अर्निंग रैली कहा जा सकता है तो इस सवाल का जवाब देते हुए उन्होंने आगे कहा कि मेरी नजर से देखें तो हाल की रैली के लिए कई कारण जिम्मेदार हैं। 2021 के आखिरी हफ्ते में हमें सांटाक्लॉज रैली देखने को मिली। छुट्टियों के मौसम के कारण एफआईआई की बिकवाली का दबाव घटता नजर आया लेकिन 2022 के पहले हफ्ते में आर्कषक वैल्यूएशन और कोरोना से जुड़ी चिताओं के घटने के कारण तेजी आती दिखी है।
उन्होंने कहा कि बैंकिंग और फाइनेशिंयल सेक्टर इस रैली में चमकते नजर आ रहे हैं। इन सेक्टरों में आई तेजी प्री-बजट रैली की ओर संकेत कर रही है क्योंकि सामान्य तौर पर यूनियन बजट में बैकिंग रिफॉर्म किए जाते हैं इसके अलावा नतीजों के मौसम के भी अच्छे रहने की संभावनाएं है जो बाजार के लिए पॉजिटीव फैक्टर का काम कर सकता है।
उन्होंने आगे कहा कि बाजार से जुड़ी तमाम नकारात्मक खबरों का असर खत्म होता नजर आ रहा है। उम्मीद है कि अगर बजट में ग्रोथ पर फोकस रहता है और इसके लिए नए एलान होते हैं तो बाजार नया हाई लगता नजर आ सकता है।
उन्होंने आगे कहा कि यूनियन बजट से तमाम संभावनाएं जुड़ी रहती है। मुझे इस बात की उम्मीद है कि 1 फरवरी को आने वाले बजट में वित्तीय घाटे पर बहुत ज्यादा ध्यान ना देते हुए ग्रोथ पर फोकस होगा। चूंकि ग्रामीण क्षेत्रों के डिमांड में कमी आती दिख रही है इसलिए बजट में ग्रामीण और MSME सेक्टर के लिए खास प्रावधान होनें चाहिए। बजट में इंफ्रास्ट्रक्चर को पुश देने के लिए गर्वमेंट की तरफ से सपोर्ट आता नजर आ सकता है। इसके अलावा कोरोना महामारी के बाद की स्थिति में संघर्ष करते हुए हॉस्पिटैलिटी औऱ ट्रांसपोर्ट सेक्टर के लिए भी राहत की खबर आ सकती है।
विनिवेश के मुद्दे पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि सफलता पूर्वक विनिवेश की नीति आगे बढ़ने के लिए इस बात की जरुरत है कि कानूनी ढ़ाचे में बदलाव किया जाएं लेकिन वर्तमान बजट में ऐसा कुछ होने की उम्मीद नजर नहीं आ रही है। हालांकि इसके बावजूद उम्मीद है कि सरकार विनिवेश पर फोकस बनाए रखेगी।
दिसंबर तिमाही के नतीजे पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि इकोनॉमी में अच्छी ग्रोथ और त्योहारी सीजन में बढ़ती मांग को ध्यान में रखते हुए इस बात की उम्मीद है कि दिसंबर तिमाही में कंपनियों के नतीजे मजबूत रहेंगे। आईटी सेक्टर का प्रदर्शन मजबूत बना रहने की संभावना है। इसके अलावा बैकिंग सेक्टर भी अच्छा प्रदर्शन कर सकता है। इंडस्ट्रियल, रियल्टी और सीमेंट सेक्टर से भी तीसरी तिमाही में अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद है। दूसरी तरफ ग्रामीण मांग में कमजोरी के कारण FMCG सेक्टर का प्रदर्शन कमजोर रह सकता है। सप्लाई से जुड़ी दिक्कतों और महंगाई दबाव के चलते इनकी आय और मार्जिन पर असर देखने को मिल सकता है।