Budget 2022: देश में जनता को कई तरह की सुविधा पहुंचाने के लिए बजट पेश किए जाते हैं। जिसमे जनता की सुविधा के लिए कई अहम फैसले लिए जाते हैं। इसी तरह राजकोषीय घाटा (Fiscal Deficit) होता है। यह एक ऐसा शब्द है, जो आपने बजट पेश करते समय कई बार सुना होगा।
Budget 2022: देश में जनता को कई तरह की सुविधा पहुंचाने के लिए बजट पेश किए जाते हैं। जिसमे जनता की सुविधा के लिए कई अहम फैसले लिए जाते हैं। इसी तरह राजकोषीय घाटा (Fiscal Deficit) होता है। यह एक ऐसा शब्द है, जो आपने बजट पेश करते समय कई बार सुना होगा।
आज हम आपको राजकोषीय घाटा के विषय में बताएंगे। राजकोषीय घाटा का मतलब सरकार की कुल कमाई और खर्च के बीच का अंतर या कह लीजिए सरकार खर्च पूरा करने के लिए कितना पैसा उधार लेगी, वह राशि ही राजकोषीय घाटा है।
राजकोषीय घाटा ही देश की आर्थिक स्थिति की सही तस्वीर दिखाते हैं। यह वह नवंबर होते हैं, जिन पर शेयर बाजार के निवेशकों से लेकर रेटिंग एजेंसियो तक की पैनी नजर रहती है। जानकारों का मानना है कि भारत अगले वित्तीय वर्ष के लिए राजकोषीय घाटे (Fiscal Deficit) का लक्ष्य सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का 6.3 फीसदी से 6.5 फीसदी रख सकता है। भारत में कोरोना वायरस संक्रमण का मामले (Covid Cases In India) बढ़ रहे हैं। नए वेरिएंट ओमीक्रोन (Omicron) की वजह से उपभोक्ता और व्यावसायिक खर्च पर असर पड़ेगा। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अब अगले वित्तीय वर्ष के लिए राजकोषीय घाटे में 30 से 50 आधार अंक की कटौती के लक्ष्य की योजना है।
कुछ जानकारों का मानना है कि राजकोषीय घाटे के लक्ष्य को पूरा करने की तुलना में सार्वजनिक व्यय अधिक महत्वपूर्ण है। अधिक खर्च से चीजों की मांग बढ़ती है। इससे देश में कारोबार को बढ़ावा मिलता है, जो अर्थव्यवस्था के लिए बेहद अच्छा होता है। कारोबार बढ़ना तब और भी महत्वपूर्ण हो जाता है जब देश की अर्थव्यवस्था की रफ्तार धीमी पड़ती दिख रही हो। बता दें कि फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण (Finance Minister Nirmala Sitharaman) 1 फरवरी को 2022-2023 के लिए बजट पेश करेंगी।
हिंदी में शेयर बाजार, स्टॉक मार्केट न्यूज़, बिजनेस न्यूज़, पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App डाउनलोड करें।