BUDGET 2022 : शेयर बाजार को बजट से हैं क्या-क्या उम्मीदें?

शेयर बाजार से जुड़े लोगों का मानना है कि वित्त मंत्री को सिक्योरिटी ट्रांजेक्शन टैक्स (STT) खत्म कर देना चाहिए या इसमें कमी करनी चाहिए

अपडेटेड Jan 19, 2022 पर 6:06 PM
पिछले साल 1 फरवरी को सेंसेक्स (Sensex) 2314 अंक चढ़कर 48,600 अंक पर बंद हुआ था। निफ्टी 50 (Nifty) भी 646 अंक की तेजी के साथ 14,281 अंक पर क्लोज हुआ था।

पिछले साल 1 फरवरी को शेयर बाजार (Share Markets) जबर्दस्त तेजी के साथ बंद हुए थे। दरअसल, स्टॉक मार्केट को वित्त वर्ष 2021-22 का बजट बहुत पसंद आया था। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) ने पिछले साल 1 फरवरी को वित्त वर्ष 2021-22 का बजट पेश किया था। शेयर बाजार ने बजट का जश्न मनाया था। यही वजह है कि सेंसेक्स (Sensex) 2314 अंक चढ़कर 48,600 अंक पर बंद हुआ था। निफ्टी 50 (Nifty) भी 646 अंक की तेजी के साथ 14,281 अंक पर क्लोज हुआ था। इस बार भी शेयर बाजार को बजट से काफी उम्मीदें हैं। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को वित्त वर्ष 2022-23 का बजट पेश करेंगी।

शेयर बाजार से जुड़े लोगों का मानना है कि वित्त मंत्री को सिक्योरिटी ट्रांजेक्शन टैक्स (STT) खत्म कर देना चाहिए या इसमें कमी करनी चाहिए। इसकी वजह यह है कि इसे लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस (Long Term Capital Gains) की जगह लागू किया गया था। लेकिन, अब शेयरों की बिक्री से होने वाले फायदे पर कैपिटल गेंस टैक्स लगता है। इसलिए एक साथ दोनों टैक्स होना ठीक नहीं है। इसके अलावा इन्वेस्टमेंट आकर्षित करने के लिए घरेलू शेयर बाजार से जुड़े नियमों को दूसरे उभरते बाजारों के मुकाबले आसान बनाना जरूरी है। ऐसे में कैपिटल गेंस टैक्स में कमी करना सही कदम होगा।

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स्टॉक मार्केट का यह भी मानना है कि सरकार को आर्थिक सुधार (Economic Reforms) की प्रक्रिया जारी रखनी चाहिए। इससे ग्रोथ को बढ़ावा मिलेगा। कोरोना से बेहाल अर्थव्यवस्था (Economy) की ग्रोथ बढ़ाने के उपाय जरूरी हैं। सरकार को इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी अपना फोकस बनाए रखना चाहिए। इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में निवेश बढ़ाने का अर्थव्यवस्था पर चौतरफा असर पड़ता है। इससे रोजगार के मौके बढ़ते हैं। साथ ही सीमेंट, आयरन सहित कई चीजों की डिमांड बढ़ती है।

मार्केट को उम्मीद है कि वित्त मंत्री राजकोषीय स्थिति में सुधार के भी उपाय करेंगी। सरकार की राजकोषीय स्थिति (Fiscal Condition) सुधरने से उसे बाजार के कम कर्ज लेना होगा। इससे सिस्टम में लिक्विडिटी पर्याप्त बनी रहेगी। साथ ही उद्योग और व्यापार के लिए कर्ज महंगा नहीं होगा। इन्वेस्टमेंट बढ़ाने के लिए कर्ज का सस्ता होना जरूरी है।

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