मध्यम वर्ग खासकर नौकरीपेशा लोगों (Salaried Persons) को बजट (Budget 2022) से काफी उम्मीदें हैं। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) 1 फरवरी को बजट पेश करेंगी। यह उनका चौथा बजट होगा। वह अपने बजट के जरिए कोरोना की मार से बेहाल आम लोगों को बड़ी राहत दे सकती हैं। आइए जानते हैं बजट में किन उपायों से आम लोगों को बड़ा फायदा होगा।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण स्टैंडर्ड डिडक्शन (Standard Deduction) को बढ़ा सकती हैं। अभी स्टैंडर्ड डिडक्शन 50,000 रुपये है। इसे बढ़ाकर कम से कम 75,000 रुपये करने की जरूरत है। स्टैंडर्ड डिडक्शन को वित्त वर्ष 2005-2006 में खत्म कर दिया गया था। इसे वित्त वर्ष 2018-19 में फिर से लागू किया गया। तब 40,000 रुपये का स्टैंडर्ड डिडक्शन दिया गया। हालांकि, इसके एवज में ट्रांसपोर्ट अलाउंस और मेडिकल रिइंबर्समेंट को खत्म कर दिया गया। इसे दोबारा लागू करने के अगले साल यानी वित्त वर्ष 2019-20 में बढ़ाकर 50,000 रुपये कर दिया गया।
बीते सालों में मुद्रास्फीति (Inflation) के असर और नौकरीपेशा लोगों के बढ़ते खर्च को देखते हुए 50,000 रुपये का स्टैंडर्ड डिडक्शन नाकाफी है। कोरोना की महामारी के चलते लोगों का मेडिकल एक्सपेंडिचर (Medical Expenditure) बढ़ा है। इसके अलावा वर्क फ्रॉम होम (Work From Home) के चलते फर्नीचर, इलेक्ट्रिसिटी और इंटरनेट जैसे खर्च पहले के मुकाबले बढ़ गए हैं। इसलिए वित्त मंत्री को स्टैंडर्ड डिडक्शन की रकम बढ़ाने की जरूरत है। इससे नौकरीपेशा लोगों को बहुत राहत मिलेगी।
दुनिया की कई देशों की सरकारों ने कोरोना के चलते स्वास्थ्य खर्च में वृद्धि को देखते हुए अलग से टैक्स छूट देने का ऐलान किया है। इनमें अमेरिका, इंग्लैंड, आयरलैंड सहित कई देश शामिल हैं। कुछ देशों की सरकारों ने वर्क फ्रॉम को देखते हुए भी लोगों को टैक्स में कुछ राहत दी है। लेकिन, भारत में अब तक किसी तरह की राहत नहीं दी गई है। अगर इस बार बजट में वित्त मंत्री अलग से कुछ टैक्स छूट का ऐलान करती हैं तो इससे आम लोगों को बड़ी राहत मिलेगी।
क्या है स्टैंडर्ड डिडक्शन?
सरकार स्टैंडर्ड डिडक्शन के जरिए नौकरीपेशा और पेंशन पाने वाले लोगों को टैक्स से कुछ राहत देने की कोशिश करती है। स्टैंडर्ड डिडक्शन की रकम को टैक्सपेयर की ग्रॉस सैलरी (Gross Salary) से घटा दिया जाता है। इससे उसकी टैक्सयोग्य आय घट जाती है, जिससे उस पर टैक्स का बोझ भी कम हो जाता है। इसे एक उदाहरण से समझा जा सकता है। मान लीजिए किसी टैक्सपेयर की ग्रॉस सैलरी सालाना 6,00,000 रुपये है। इस व्यक्ति की टैक्स योग्य आमदनी निकालने के लिए 6,00,000 रुपये में से 50,000 रुपये घटा दिए जाते हैं।