Budget 2023: पार्ट्स पर 5% GST, FAME 2 सब्सिडी की अवधि बढ़ाने से तेज दौड़ेगी EV इंडस्ट्री

union budget 2023: सरकार इलेक्ट्रिक व्हीकल्स का इस्तेमाल बढ़ाने की कोशिश कर रही है। इसलिए अगले यूनियन बजट में फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण ईवी के लिए कुछ बड़े ऐलान कर सकती हैं। SMEV ने सरकार से FAME II के तहत सब्सिडी की समयसीमा बढ़ाने की मांग की है

अपडेटेड Jan 05, 2023 पर 5:33 PM
एसएमईवी ने बताया है कि अभी इलेक्ट्रिक व्हीकल्स के स्पेयर पार्ट्स पर टैक्स का रेट एक समान नहीं है। कुछ स्पेयर पार्ट्स पर 28 फीसदी तक जीएसटी चुकाना पड़ता है। सरकार को ईवी के सभी स्पेयर पार्ट्स पर जीएसटी की 5 फीसदी की एक समान दर लागू करनी चाहिए।

Budget 2023: अगले यूनियन बजट (Union Budget) में इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EV) के लिए कुछ बड़े ऐलान किए जा सकते हैं। सोसायटी ऑफ मैन्युफैक्चरर्स ऑफ इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (SMEV) ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को अपनी मांग के बारे में बताया है। उसने FAME II के तहत ईवी पर सब्सिडी की समयसीमा बढ़ाने की मांग की है। उसने लाइट और हेवी कमर्शियल व्हीकल्स को भी FAME II के दायरे में लाने की मांग की है। इससे ईवी का इस्तेमाल बढ़ाने में मदद मिलेगी। उसने इलेक्ट्रिक व्हीकल्स के स्पेयर पार्ट्स पर जीएसटी का एकसमान 5 फीसदी रेट लागू करने की मांग की है। फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) 1 फरवरी, 2023 को यूनियन बजट पेश करेंगी। माना जा रहा है कि वह देश में ईवी का इस्तेमाल बढ़ाने के लिए कुछ बड़े ऐलान करेंगी।

FAME II की वैलिडिटी 31 मार्च, 2024 को खत्म हो रही है

SMEV ने कहा है कि FAME II की वैलिडिटी 31 मार्च, 2024 को खत्म हो रही है। सरकार को इसे बढ़ाने की जरूरत है। सब्सिडी जारी रहने से ईवी का इस्तेमाल बढ़ाने में मदद मिलेगी। FAME II को ई-मोबिलिटी कनवर्जन से भी लिंक करने की जरूरत है। एसएमईवी का कहना है कि ई-मोबिलिटी खासकर इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स की तेज ग्रोथ जारी रहने की उम्मीद है। टू-व्हीलर के कुल मार्केट में इलेक्ट्रिक टू-व्हीकल्स की हिस्सेदारी 20 फीसदी पहुंच जाने के बाद ईवी टू-व्हीलर का इस्तेमाल तेजी से बढ़ेगा।


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कमर्शियल व्हीकल्स में भी ई-मोबिलिटी है जरूरी

SMEV ने कहा है कि फेम 2 स्कीम में ऐसा प्रावधान होना चाहिए, जिससे सब्सिडी सीधे ग्राहक को ट्रांसफर कर दिया जाए। देश में अगले तीन से चार साल में ट्रक और हेवी कमर्शियल व्हीकल्स को भी ई-मोबिलिटी के तहत लाने की जरूरत है। लाइट कमर्शियल व्हीकल्स (LCV) और मीडियम एंड हेवी कमर्शियल व्हीकल्स (M&HCV) को ई-मोबिलिटी के तहत लाने के लिए प्रोजेक्ट शुरू किया जाना चाहिए।

हेवी व्हीकल्स में ई-मोबिलिटी के लिए स्कीम की जरूरत

इंडिया में ईंधन की कुल खपत में ट्रकों की 40 फीसदी हिस्सेदारी है। रोड ट्रांसपोर्ट सेक्टर में ग्रीन हाउस इमिशन में भी ट्रकों की हिस्सेदारी 40 फीसदी से ज्यादा है। अगर ट्रकों को ई-मोबिलिटी के तहत लाने के लिए स्कीम शुरू की जाती है तो इससे ग्रीन हाउस इमिशन में भी कमी आएगी। फेम 2 के तहत सब्सिडी के दायरे में ट्रैक्टर्स को भी लाए जाने की जरूरत है। इससे किसान ई-ट्रैक्टर्स का इस्तेमाल बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित होंगे।

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स्पेयर पार्ट्स पर जीएसटी की एकसमान दर लागू हो

एसएमईवी ने बताया है कि अभी इलेक्ट्रिक व्हीकल्स के स्पेयर पार्ट्स पर टैक्स का रेट एक समान नहीं है। कुछ स्पेयर पार्ट्स पर 28 फीसदी तक जीएसटी चुकाना पड़ता है। सरकार को ईवी के सभी स्पेयर पार्ट्स पर जीएसटी की 5 फीसदी की एक समान दर लागू करनी चाहिए। उसने Cells पर बेसिक कस्टम ड्यूटी को भी घटाकर तब तक जीरो फीसदी करने की मांग की है, जब तक इनका उत्पादन देश में शुरू नहीं हो जाता है।

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