Budget 2023: सरकार ने 9 दिसंबर को अरुणाचल में सीमा पर चीनी सैनिकों के दुस्साहस को गंभीरता से लिया है। 1 फरवरी, 2023 को पेश होने वाले बजट (Union Budget 2023) में चीन के साथ व्यापार घटाने के बड़े उपायों के ऐलान हो सकते हैं। अभी इंडिया चीन से कई चीजों का बड़े पैमाने पर इंपोर्ट करता है। सरकार चीन से इंपोर्ट घाटने के लिए टैरिफ और नॉन-टैरिफ उपायों का इस्तेमाल करने के बारे में सोच रही है। आत्मनिर्भर भारत पर सरकार का फोकस पहले से है। सरकारी सूत्रों का कहना है कि वित्त मंत्री अगले बजट में बड़े उपायों का ऐलान कर सकती है। इसके लिए फाइनेंस मिनिस्ट्री में कई तरह के विकल्पों पर विचार किया जा रहा है। फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) 1 फरवरी, 2023 को यूनियन बजट का ऐलान करेंगी
पहले तैयार प्रोडक्ट्स पर कसेगा शिकंजा
एक्सपर्ट्स का कहना है कि अभी इंडिया चीन से कई ऐसी चीजों का इंपोर्ट करता है, जिनका इस्तेमाल इंडियन मैन्युफैक्चरिंग कंपनियां बतौर इनपुट करती हैं। इसलिए चीन से इंपोर्ट की लिस्ट में कमी लाने का फैसला जल्दबाजी में करने के बजाय सरकार सोचसमझ कर करना चाहती है। फिलहाल, उन चीजों के आयात पर पाबंदी नहीं लगाई जाएगी, जिनका इस्तेमाल इंडियन कंपनियां मैन्युफैक्चरिंग के लिए करती हैं। अभी सरकार की नजरें चीन से आयात होने वाले तैयार प्रोडक्ट्स पर शिकंजा कसने पर है। ऐसा उत्पादों का आयात चीन से सीधे या दूसरे देश के जरिए हो रहा है।
कस्टम ड्यूटी बढ़ाने की तैयारी
एक सूत्र ने बताया कि सरकार सबसे पहले चीन के तैयार उत्पादों पर कस्टम ड्यूटी बढ़ाने पर विचार कर रही है। इससे चीन के उत्पाद इंडियन मार्केट में महंगे हो जाएंगे। इसके अलावा सरकार उन चीनी उत्पादों पर एंटी-डंपिंग ड्यूटी लगाना चाहती है, जिन्हें चीन इंडिया में बहुत कम प्राइस पर बेचता है। एंटी-डंपिंग ड्यूटी लगने से इंडियन मार्केट में ऐसे उत्पाद महंगे हो जाएंगे, जिससे उनकी डिमांड घटेगी। सरकार ऐसे उत्पादों का उत्पादन देश में ही बढ़ाने पर फोकस करना चाहती है। हालांकि, सरकार की यह कोशिश नई नहीं है। पिछले कई सालों में चीन से आयात होने वाले कई चीजों के इंपोर्ट में कमी आई है। दिवाली पर सजावट के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले लाइटिंग प्रोडक्ट्स इसके उदाहरण हैं। अब इंडिया में ही ऐसे प्रोडक्ट्स बनाए जा रहे हैं, जिनकी क्वालिटी चीन के उत्पादों के मुकाबले अच्छी है।
कुल इंपोर्ट में घट रही चीन की हिस्सेदारी
फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशंस (FIEO) के मुताबिक, अप्रैल से सितंबर 2022 के दौरान इंडिया के कुल इंपोर्ट में चीन की हिस्सेदारी में कमी आई है। इंडिया में ऐसी कई चीजों का उत्पादन होने लगा है, जिन्हें पहले चीन से आयात करना पड़ता है। खासकर कोरोना की महामारी के बाद चीन की जीरो-कोविड पॉलिसी को देखते हुए चीन से आयात का विकल्प तलाशने पर फोकस बढ़ा है।
व्यापार में इंडिया पर कितना भारी पड़ता है चीन?
चीन इंडिया का दूसरा सबसे बड़ा ट्रेडिंग पार्टनर है, पहले नंबर पर अमेरिका है। फाइनेंशियल ईयर 2021-22 में भारत और चीन का द्विपक्षीय व्यापार 115.83 अरब डॉलर था। अमेरिका के साथ इंडिया का व्यापार चीन के मुकाबले थोड़ा (119 अरब डॉलर) ही ज्यादा है। 2021-22 में चीन के साथ इंडिया का व्यापार घाटा 73.12 अरब डॉलर था। साल 2000 से चीन से इंडिया के आयात में तेज उछाल देखने को मिला है। 2001-02 में चीन से इंडिया का आयात 2 अरब डॉलर था, जो अब 94 अरब डॉलर से ज्यादा हो गया है। पिछले 20-21 साल में चीन को इंडिया का एक्सपोर्ट 1 अरब डॉलर से बढ़कर सिर्फ 21 अरब डॉलर हुआ है।