Budget 2023: फाइनेंस मिनिस्ट्री (Finance Ministry) ने इस साल कंपनियों की तरफ से दिए जाने वाले 20,000 रुपये से ज्यादा के गिफ्ट्स को TDS के दायरे में लाया था। गिफ्ट्स के तहत आने वाली चीजों का दायरा बहुत बड़ा है। इनमें फ्री एयरलाइन टिकट, म्यूजिक सिस्टम्स, फ्री डाइनिंग वाउचर्स तक शामिल हैं। इनकी वैल्यू 20,000 रुपये से ज्यादा होने की स्थिति में इन पर टीडीएस लागू होता है। टीडीएस काटने की जिम्मेदारी कंपनी पर होती है। सरकार ने यह कदम टैक्स बेस बनाने के लिए उठाया है। लेकिन, इससे कंपनियों पर कंप्लायंस का बोझ काफी बढ़ गया है। इस बारे में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को उन्होंने बताया है। उनका मानना है कि अगर वित्त मंत्री यूनियन बजट 2023 (Union Budget) में नए नियम को हटाने का ऐलान करती हैं तो उन्हें अपने बिजनेस पर फोकस बढ़ाने में मदद मिलेगी।
छोटी कंपनियों को हो रही ज्यादा मुश्किल
चार्टर्ड अकाउंटेंसी फर्म SP Kapoor & Co के सीईओ संजीव शिव कपूर ने कहा कि हालांकि सरकार के इस कदम से टैक्स बेस का विस्तार हुआ है, लेकिन इससे कंपनियों पर कंप्लायंस का बोझ बढ़ गया है। खासकर छोटी कंपनियों को इससे काफी दिक्कत हो रही है। उन्होंने कहा, "जैसे ही टीडीएस डिडक्ट किया जाता है वैसे ही कई तरह के डिडक्शंस बढ़ जाते हैं। टीडीएस के मामले में पेनाल्टी बहुत ज्यादा है। सरकार को इस नियम को सभी कंपनियों के लिए लागू नहीं करना चाहिए था। सिर्फ एक सीमा से ज्यादा टर्नओवर वाली कंपनियों को इसके दायरे में लाना चाहिए था।"
कंप्लायंस बढ़ने से बिजनेस पर फोकस नहीं कर पा रहीं कंपनियां
कई कंपनियां अपने बिजनेस के हिसाब से एक साल में कई बार अलग-अलग तरह के प्रोग्राम करती हैं। इनमें डिस्ट्रिब्यूटर्स, एजेंट्स, डीलर आदि को इनसेंटिव दिए जाते हैं। कई बार गिफ्ट्स भी दिए जाते हैं। टीडीएस के तहत 20,000 रुपये से ज्यादा मूल्य के गिफ्ट्स को लाया गया है। कंपनियों के गिफ्ट्स इस सीमा से ज्यादा मूल्य के होते हैं। ऐसे में छोटी कंपनियों के लिए टीडीएस काटने और उसे सरकार के पास जमा करना जरूरी हो जाता है। छोटी कंपनियों में एंप्लॉयीज की संख्या सीमित होती है। इस वजह से यह नियम उनके लिए नया सिरदर्द बन गया है।
50,000 रुपये से ज्यादा का पेमेंट्स भी रिपोर्टिंग के दायरे में
सरकार ने खास तरह की बिजनेस एक्टिविटी जैसे इनवेंट मैनेजमेंट, टीवी प्रोग्राम के प्रोडक्शंस और स्पोर्ट्स एंड इवेंट मैनेजमेंट में शामिल लोगों को 50,000 रुपये से ज्यादा के पेमेंट्स को भी रिपोर्टिंग के दायरे में ला दिया है। इससे भी कंप्लायंस का बोझ बढ़ा है। एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री पर पहले से ही 18 फीसदी का जीएसटी लगता है। ऐसे में सरकार के नए कदमों से कंपनियों खासकर छोटी कंपनियों के लिए मुश्किल पैदा हुई हैं।