Budget 2023: अगले यूनियन बजट में अगर एनर्जी इंडस्ट्री की मांग पूरी हुई तो उसकी चमक बढ़ जाएगी। इंडस्ट्री ने पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स को GST के दायरे में लाने की मांग की है। CII का भी मानना है कि सरकार को बजट में पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स को जीएसटी के दायरे में लाने का ऐलान करना चाहिए। साथ ही इलेक्ट्रिसिटी टैरिफ और रियल एस्टेट को भी जीएसटी के तहत लाने की कोशिश होनी चाहिए। जीएसटी घटाने या बढ़ाने के फैसले GST Council लेती है। लेकिन, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) इस काउंसिल की प्रमुख हैं, जिससे वह इस बारे में बजट में ऐलान कर सकती है।
एनर्जी सेक्टर के लिए खराब रहा यह साल
FICCI ने कहा है कि जब तक पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स को जीएसटी के तहत नहीं ला दिया जाता है उत्पाद शुल्क से जुड़े कानूनों में संशोधन किया जाना चाहिए ताकि इनपुट्स/इनपुट सर्विसेज और कैपिटल गुड्स पर चुकाए गए जीएसटी पर क्रेडिट की इजाजत मिल सके। एनर्जी सेक्टर के लिए यह साल अच्छा नहीं रहा। फरवरी में यूक्रेन पर रूस के हमले से जियोपॉलिटिकल तनाव की स्थिति पैदा हुई। सप्लाई चेन में रुकावट आई। उधर, इंटरेस्ट रेट्स बढ़ने से अमेरिका और यूरोप पर मंदी का खतरा बढ़ा।
Fossil Fuel का इस्तेमाल घटाने पर फोकस जरूरी
रूस-यूक्रेन लड़ाई की वजह से एनर्जी के ग्लोबल मार्केट में उतार-चढ़ाव देखने को मिला। इससे दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाएं एनर्जी के अपने स्रोतों पर फिर से विचार करने को मजबूर हो गई हैं। जलवायु परिवर्तन की समस्या पर भी फोकस बढ़ा है। इसकी वजह यह है कि कई देशों में नेट-जीरो कार्बन इमिशन की डेडलाइन धीरे-धीरे नजदीक आ रही है। ऐसे में इन देशों में Fossil Fuels का इस्तेमाल घटाने पर फोकस बढ़ाना होगा।
क्रूड ऑयल के प्राइस में बहुत ज्यादा उतार-चढ़ाव
यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद क्रूड ऑयल (ब्रेंट क्रूड) का प्राइस मार्च में 139 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया था। हालांकि, यह अब करीब 80 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया है। उधर, जी7 देशों ने रूस के क्रूड ऑयल के लिए 60 डॉलर प्रति बैरल की लिमिट तय कर दी है। रूस इस लिमिट से कम प्राइस पर किसी देश को क्रूड ऑयल नहीं बेच सकता है। दरअसल, पश्चिमी देशों के प्रतिबंध लगा देने के बाद रूस ने चीन, इंडिया सहित कुछ देशों को बहुत सस्ते भाव पर क्रूड ऑयल बेचने लगा था। ऐसा करने से उसे रोकने के लिए G7 देशों ने यह कदम उठाया है।
पावर सेक्टर को स्पेशिफाइड बिजनेस कैटेगरी में शामिल करने की जरूरत
एनर्जी इंडस्ट्री ने सरकार से पावर सेक्टर को सेक्शन 35AD के तहत स्पेसिफाइड बिजनेस की कैटेगरी में शामिल करने की गुजारिश की है। इससे एनर्जी सेक्टर की कंपनियों को पिछले साल किए पूंजीगत खर्च पर 100 फीसदी डिडक्शन की इजाजत मिल जाएगी। कंसल्टेंसी फर्म Deloitte ने कहा है, "पावर, रेलवे डेवलपमेंट और एयरपोर्ट डेवलपमेंट के प्रोजेक्ट्स में काफी पूंजी लगाने की जरूरत होती है। ऐसे में रिन्यूएबल पावर प्लांट्स लगाने और चलाने, रेलवे-एयरपोर्ट्स के डेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स को स्पेसिफाइड बिजनेस की कैटेगरी में शामिल करना चाहिए।"
CII ने विंड टर्बाइन के ऑरिजिनल इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर्स (OEMs) को इनसेंटिव देने की मांग की है। उसने कहा है कि विंड टर्बाइन के OEMs और कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग को PLI के लाभ मिलने चाहिए। नए मेगावॉट साइज टर्बाइन (3 से 5 मेगावॉट) के नए डेवलपमेंट को इससे बढ़ावा मिलेगा।