Budget 2023: निर्मला सीतारमण के बजट में रियल एस्टेट सेक्टर को टैक्स छूट में ज्यादा रियायत सहित मिल सकते हैं ये तोहफे

Budget 2023: निर्मला सीतारमण को बजट में रियल एस्टेट सेक्टर के लिए सिंगल-विंडो क्लीयरेंस का ऐलान करना चाहिए। रियल एस्टेट सेक्टर को इंडस्ट्री का स्टेटस भी मिलना चाहिए। किफायती आवास को बढ़ावा देने के लिए बजट में उपाय किए जा सकते हैं

अपडेटेड Dec 29, 2022 पर 7:46 PM
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बजट में सरकार को सिंगल-विंडो क्लीयरेंस और रियल एस्टेट सेक्टर को इंडस्ट्री स्टेटस देना चाहिए।

Budget 2023: फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण के नए बजट से जिन सेक्टर को सबसे ज्यादा उम्मीदें हैं, उनमें रियल एस्टेट सेक्टर शामिल है। इसकी वजह यह है कि कोरोना की महामारी के बाद अब इस सेक्टर में गतिविधियां बढ़ रही हैं। घर की मांग में भी इजाफा हुआ है। रियल एस्टेट कंपनियां उन कंपनियों को जल्द पूरा करने की कोशिश कर रही हैं, जिन पर काम बंद था। कुछ नए प्रोजेक्ट्स भी लॉन्च हुए हैं। ऐसे में अगर इस सेक्टर को सरकार की मदद मिलती है तो सोने पे सुहागा हो सकता है। रियल एस्टेट सेक्टर के प्रतिनिधियों ने फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण को अपनी मांग के बारे में बताया है। सबसे जरूरी हैं इस सेक्टर के लिए कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capital Expenditure) बढ़ाने के उपाय। इसका सीधा फायदा रियल एस्टेट सेक्टर को मिलेगा।

किफायती आवास योजना को मिले प्रोत्साहन

निर्मला सीतारमण को बजट में रियल एस्टेट सेक्टर के लिए सिंगल-विंडो क्लीयरेंस का ऐलान करना चाहिए। रियल एस्टेट सेक्टर को इंडस्ट्री का स्टेटस भी मिलना चाहिए। किफायती आवास को बढ़ावा देने के लिए बजट में उपाय किए जा सकते हैं। कोरोना की महामारी का असर सस्ते घरों की योजना पर भी पड़ा है। हालांकि, अब स्थिति धीरे-धीरे ठीक हो रही है। किफायती घरों से जुड़ी योजनाओं पर सरकार  2014 से जोर दे रही है। करीब दो साल बाद फिर से बायर्स की तरफ से इस सेगमेंट में डिमांड धीरे-धीरे बढ़ने लगी है। सरकार की मदद मिलने से किफायती घरों के प्रोजेक्ट्स को समय पर पूरा करने में मदद मिलेगी।


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एफोर्डेबल हाउस की परिभाषा में बदलाव जरूरी है

सरकार को किफायती आवास (Affordable home) की परिभाषा को बदलने की जरूरत है। ऐसे घरों के साइज में भी रिवीजन करने की जरूरत है। इनका साइज 60 वर्ग मीटर कारपेट एरिया तक होना चाहिए। कीमत की सीमा भी बढ़ाने की जरूरत है, क्योंकि मुंबई जैसे शहर में अभी की सीमा के अंदर घर मिलना काफी मुश्किल है। सरकार को शहरों के मुताबिक कीमतों में रिवीजन की जरूरत है, ताकि ज्यादा लोग इसका लाभ उठा सकें।

टैक्स छूट को बढ़ाने से बढ़ेगी घरों की बिक्री

घर खरीदारों के साथ-साथ निवेशकों के लिए भी टैक्स-छूट बढ़ाने की जरूरत है। इनकम टैक्स के सेक्शन 24बी के तहत होम लोन के इंटरेस्ट पर एक फाइनेंशियल ईयर में 2 लाख रुपये तक के डिडक्शन की इजाजत है। इसे बढ़ाकर 5 लाख रुपये तक करने की जरूरत है। इससे घरों की डिमांड बढ़ेगी। खासकर तेजी किफायती सेगमेंट में देखने को मिलेगी। सरकार को इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च बढ़ाने की जरूरत है, इससे भी रियल एस्टेट सेक्टर को बूस्ट मिलेगा।

(अनुज पुरी एनरॉक ग्रुप के चेयरमैन हैं)

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