बजट 2023: केंद्र सरकार का नया बजट (Union Budget 2023) आने में दो महीने से कम समय बचा है। फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) 1 फरवरी को पेश होने वाले बजट में इकोनॉमिक ग्रोथ बढ़ाने के उपायों के साथ ही देश के आम आदमी को राहत देने वाले उपायों का ऐलान कर सकती हैं। 51 प्रमुख इकोनॉमिस्ट्स ने निर्मला सीतारमण को लेटर लिखा है। इसमें सोशल सिक्योरिटी पेंशन (Social Security Pension) और मैटरनिटी बेनेफिट्स (Maternity Benefits) बढ़ाने की मांग की है। लेटर में कहा गया है कि पहले भी फाइनेंस मिनिस्टर को इस बारे में लिखा जा चुका है। अगर सरकार हमारी सलाह मान लेती है तो इससे आबादी के बड़े हिस्से को फायदा होगा।
निर्मला सीतारमण का यह पांचवां बजट
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का यह पांचवां बजट होगा। यह बजट ऐसे वक्त आ रहा है, जब कोरोना से बेहाल इकोनॉमी काफी हद तक पटरी पर आ चुकी है। ऐसे में इस बजट से लोगों को काफी उम्मीदे हैं। समाज का हर वर्ग इस बजट से अपने लिए कुछ चाहता है।
इकोनॉमिस्ट्स पहले भी लिख चुके हैं लेटर
इकोनॉमिस्ट्स की तरफ से लिखे गए लेटर में कहा गया है, "दिसंबर 2017 और दिसंबर 2018 में पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली को लिखे गए लेटर्स का यह फॉलो-अप है। हमने यूनियन बजट के लिए दो बड़ी प्रायरिटी के बारे में बताने की कोशिश की है। इनमें पहला सोशल सिक्योरिटी पेंशंस को बढ़ाना और दूसरा मैटरनिटी बेनेफिट्स के पर्याप्त प्रावधान हैं।" लेटर में कहा गया है कि चूंकि दोनों प्रस्तावों पर ध्यान नहीं दिया गया है, जिससे हम इस बारे में दोबारा लिख रहे हैं। हम अपनी पुरानी मांग के बारे में अगले बजट से पहले यह लेटर लिख रहे हैं।
कौन-कौन इकोनॉमिस्ट्स शामिल है?
इस लेटर पर हस्ताक्षर करने वाले इकोनॉमिस्ट्स में Jean Drez, Pranab Bardhan, R Nagraj, Reetika Khera और Sukhdeo Thorat शामिल हैं। द्रेज दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में मानद प्रोफेसर हैं। बर्द्धन यूनिवर्सिटी ऑफ बर्कले में इकोनॉमिक्स के प्रोफेसर हैं। नागराद मुंबई के IGIDR में इकोनॉमिक्स के प्रोफेसर हैं। रीतिक खेड़ा आईआईटी-दिल्ली में इकोनॉमिक्स की प्रोफेसर हैं। थोराट जेएनयू में प्रोफेसर हैं।
क्या चाहते हैं इकोनॉमिस्ट्स?
इन इकोनॉमिस्ट्स का मानना है कि नेशनल ओल्ड एज पेंशन स्कीम (NOAPS) के तहत ओल्ड एज पेंशन को सरकार की तरफ से मिलने वाला कंट्रिब्यूशन 2006 से 200 रुपये प्रति माह बना हुआ है। यह ठीक नहीं है। सरकार को अपना कंट्रिब्यूशन बढ़ाकर कम से कम 500 रुपये या इससे ज्यादा प्रतिमाह करना चाहिए। इसके लिए 7,560 करोड़ रुपये के अतिरिक्त आवंटन की जरूरत होगी। NOAPS के तहत 2.1 करोड़ पेंशनर्स हैं। अर्थशास्त्रियों ने सरकार से विधवा पेंशन को बढ़ाने की मांग की है। अभी यह 300 रुपये प्रति माह है। इसे बढ़ाकर कम से कम 500 रुपये प्रति माह करने की जरूरत है। इससे सरकार पर अतिरिक्त 1,560 करोड़ रुपये का बोझ पड़ेगा।