Budget 2023: 5 लाख करोड़ डॉलर की इकोनॉमी के लिए जरूरी है टुबैको प्रोडक्ट्स पर टैक्स बढ़ाना, एक्सपर्ट्स की राय

Union budget 2023: टुबैको के इस्तेमाल से कई बीमारियां होती हैं। इससे स्वास्थ्य सुविधाओं पर बोझ तो बढ़ता ही है, हेल्थ केयर पर होने वाला सरकार का खर्च भी बढ़ जाता है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि टुबैको प्रोडक्ट्स पर ज्यादा टैक्स लगाकर इसके इस्तेमाल को रोका जा सकता है

अपडेटेड Jan 03, 2023 पर 11:20 AM
एक्सपर्ट्स ने बताया कि टुबैको जैसे सिन प्रोडक्ट्स पर टैक्स में कोई वृद्धि नहीं की गई है। यह टुबैको का इस्तेमाल बढ़ने की एक बड़ी वजह है।

Budget 2023: क्या टुबैको प्रोडक्ट्स पर सरकार टैक्स बढ़ा सकती है? अगर एक्सपर्ट्स की मानें तो इस सवाल का जवाब हां है। उनका कहना है कि सभी टुबैको प्रोडक्ट्स पर टैक्स बढ़ाना न सिर्फ लोगों की अच्छी सेहत के लिए जरूरी है बल्कि इससे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2025 तक 5 लाख करोड़ डॉलर की इकोनॉमी के विजन को भी पूरा करने में मदद मिलेगी। एक्सपर्ट्स ने टुबैको प्रोडक्ट्स के लिए सख्त कानून बनाने की भी मांग की है। केंद्र सरकार का अगला यूनियन बजट (Union Budget 2023) अगले महीने आने वाला है। फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) 1 फरवरी, 2023 को बजट पेश करेंगी। यह 2014 के लोकसभा चुनावों से पहले केंद्र सरकार का आखिरी पूर्ण बजट होगा। यह केंद्र की मोदी सरकार 2.0 का पांचवां पूर्ण बजट होगा।

टुबैको प्रोडक्ट्स के इस्तेमाल से बढ़ती है गरीबी

लखनऊ यूनिवर्सिटी के डिपार्टमेंट ऑफ इकोनॉमिक्स के हेड प्रोफेसर अरविंद मोहन ने बताया कि इंडिया में टुबैको के इस्तेमाल की वजह से स्वास्थ्य सुविधाओं पर काफी बोझ पड़ता है। यह जीडीपी का करीब 1.04 फीसदी है। टुबैको के इस्तेमाल की वजह से कई परिवार गरीबी में चले जाते हैं। अगर स्वास्थ्य को गंभीर नुकसान पहुंचाने वाली चीजों पर टैक्स बढ़ाया जाता है तो इस बोझ को घटाया जा सकता है।


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हेल्थ सर्विसेज पर लोगों को अपनी जेब से खर्च करने पड़ते हैं पैसे

अरविंद मोहन ने एक कार्यक्रम में ये बातें बताईं। उन्होंने विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और वर्ल्ड बैंक जैसे दूसरे अंतरराष्ट्रीय संगठनों की राय के बारे में भी बताया। उन्होंने कहा कि इन सगंठनों का भी यह मानना है कि टैबुको प्रोडक्ट्स पर टैक्स बढ़ाकर इसके इस्तेमाल में जल्द कमी लाया जा सकता है। उन्होंने बताया कि अभी मानव विकास के लिए स्वास्थ्य एक बड़ी चुनौती है। स्वास्थ्य पर होने वाला करीब 70 फीसदी खर्च लोग खुद अपनी जेब से कर रहे हैं। सिर्फ 25-30 फीसदी खर्च सरकार या दूसरी संस्थाओं की तरफ से किया जा रहा है।

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टुबैको प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल घटने से जीडीपी की ग्रोथ बढ़ेगी

उन्होंने कहा, "अगर हम टुबैको पर टैक्स बढ़ाकर इस खर्च में कमी लाने की कोशिश करते हैं तो हम न सिर्फ अपने मानव संसाधन का सही इस्तेमाल कर सकेंगे बल्कि इससे जीडीपी में भी कई गुनी बढ़ोतरी हो सकती है। इससे 5 ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी बनने के हमारे सपने को पूरा करने में भी मदद मिल सकती है।" 'टुबैको फ्री इंडिया' की तरफ से आयोजित एक सेमिनार में सीनियर जर्नलिस्ट शिशिर सिन्हा से बातचीत में एक्सपर्ट्स ने बताया कि टुबैको जैसे सिन प्रोडक्ट्स पर टैक्स में कोई वृद्धि नहीं की गई है। यह टुबैको का इस्तेमाल बढ़ने की एक बड़ी वजह है।

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