बजट 2023: यूनियन बजट में इन उपायों से बढ़ेगा एक्सपोर्ट, व्यापार घाटे में आएगी कमी

हाल में डॉलर के मुकाबले रुपये की वैल्यू बहुत गिरी है। इससे विदेशी बाजार में इंडियन प्रोडक्ट्स की प्रतिस्पर्धी क्षमता घटी है। ऐसे में एक्सपोर्ट सेक्टर सरकार से मदद की उम्मीद लगाए बैठा है। FIEO का मानना है कि अगर सरकार बजट में निर्यातकों की सुध लेती है तो इससे रोजगार के मौके पैदा करने में भी मदद मिलेगी

अपडेटेड Dec 08, 2022 पर 2:50 PM
करीब दो साल के बाद निर्यात में गिरावट देखने को मिली है। अक्टूबर में यह 16.65 फीसदी घटकर 29.78 अरब डॉलर रह गया। इसकी वजह ग्लोबल डिमांड में आई कमी है।

बजट 2023: यूनियन बजट (Union Budget) से निर्यातकों को बहुत उम्मीदें हैं। फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण (Finance Minister Nirmala Sitharaman) 1 फरवरी, 2023 को बजट पेश करेंगी। फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशन (FIEO) ने सीतारमण को उन मुश्किलों के बारे में बताया है, जिसका सामना एक्सपोर्ट सेक्टर कर रहा है। उसने वित्तमंत्री से बजट में ऐसे उपाय करने की भी मांग की है, जिससे निर्यातकों की मुश्किलें दूर हो जाए। हाल में डॉलर के मुकाबले रुपये की वैल्यू बहुत गिरी है। इससे विदेशी बाजार में इंडियन प्रोडक्ट्स की प्रतिस्पर्धी क्षमता घटी है। ऐसे में एक्सपोर्ट सेक्टर सरकार से मदद की उम्मीद लगाए बैठा है। FIEO का मानना है कि अगर सरकार बजट में निर्यातकों की सुध लेती है तो इससे रोजगार के मौके पैदा करने में भी मदद मिलेगी। नियार्त क्षेत्र में रोजगार पैदा करने की बहुत संभावनाएं हैं।

निर्यात क्षेत्र में रोजगार के मौके पैदा करने की क्षमता

फेडरेशन ने कहा है, "अभी रोजगार के मौके बढ़ाना सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती है। हम सरकार से उन इकाइयों को आर्थिक मदद देने की गुजारिश करते हैं, जो निर्यात के क्षेत्र में रोजगार के अतिरिक्त मौके पैदा करते हैं। सरकार के इस कदम से लोगों को अनौपचारिक रोजगार की जगह औपचारिक रोजगार हासिल करने में मदद मिलेगी।" उसने कहा है कि सरकार दो मानकों पर ऐसी इकाइयों की मदद कर सकते हैं। इनमें पहला एक्सपोर्ट ग्रोथ और दूसरा वर्कर्स की संख्या में बढ़ोतरी है।


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एक्सपोर्ट डेवलपमेंट फंड बनाने से होगा फायदा

FIEO का कहना है कि जब ग्लोबल डिमांग घट रही है तो एग्रेसिव मार्केटिंग जरूरी है। लेकिन, एक्सपोर्ट से जुड़ी इंडियन कंपनियां मार्केटिंग पर खर्च घटा रही हैं। इससे निर्यात को नुकसान होगा। अगर ग्लोबल मार्केट में इंडियन प्रोडक्ट्स नहीं दिखेंगे तो कंपनियों को ऑर्डर मिलने में दिक्कत आएगी। उसने कहा है कि मार्केट डेवलपमेंट एसिस्टेंस (MDA) स्कीम के तहत कुल आवंटन 200 करोड़ रुपये से कम है। 460-470 अरब डॉलर के एक्सपोर्ट को प्रमोट करने के लिए यह फंड बहुत कम है। इसलिए सरकार को एक Export Development Fund बनाना चाहिए। इसका साइज एक साल के कुल एक्सपोर्ट का कम से कम 0.5 फीसदी होना चाहिए।

दो साल बाद निर्यात में आई है गिरावट

करीब दो साल के बाद निर्यात में गिरावट देखने को मिली है। अक्टूबर में यह 16.65 फीसदी घटकर 29.78 अरब डॉलर रह गया। इसकी वजह ग्लोबल डिमांड में आई कमी है। एक्सपोर्ट में कमी से ट्रेड डेफिसिट बढ़कर 26.91 अरब डॉलर हो गया। अक्टूबर में जेम्स एंड ज्वेलरी, इंजीनियरिंग, पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स, रेडीमेड गारमेंट्स, केमिकल, फार्मा, मरीन प्रोडक्ट्स और लेदर के एक्सपोर्ट में गिरावट आई।

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