Budget 2023: केंद्र सरकार के अगले बजट (Budget 2023) में सरकार पिछले बजटों में अपनाए गए एप्रोच को जारी रखेगी। पिछले बजटों में ग्रोथ के लिए जो बुनियाद बनाई गई है, उस पर सरकार इकोनॉमी की मजबूत इमारत खड़ा करने की कोशिश करेगी। फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) ने 16 दिसंबर को ये बातें बताईं। उन्होंने प्रमुख उद्योग चैंबर FICCI के प्रोग्राम में कहा कि हम अगले बजट में इंडिया के अगले 25 साल को ध्यान में रखकर कदम उठाएंगे। बजट से पहले फाइनेंस मिनिस्टर के इस बयान को बहुत अहम माना जा रहा है। इससे यह संकेत मिलता है कि सरकार का फोकस अगले बजट में उन उपायों पर होगा, जो लंबी अवधि में इकोनॉमी की तेज ग्रोथ का रास्ता बनाएंगे। वित्त मंत्री 1 फरवरी, 2013 को यूनियन बजट (Union Budget) पेश करेंगी।
सरकार की नजरें 2047 के विकसित भारत पर है
फाइनेंस मिनिस्टर ने कहा कि हमारी नजरें 2047 के इंडिया पर हैं। हम अगले 25 साल के लिए प्लान बना रहे हैं...हम 2047 के इंडिया को देख रहे हैं जब आजादी के 100 साल पूरे होंगे। हम अपने बच्चों को 2047 में ऐसा इंडिया देना चाहते हैं जो काफी विकसित होगा। इंडिया ऐसा देश होगा, जिसमें युवा और बुजुर्ग एक साथ खुशी और आराम से रह सकेंगे। सीतारमण के 1 फरवरी को पेश होने वाले बजट से काफी उम्मीदें है। यह बजट ऐसे वक्त आ रहा है, जब ग्लोबल इकोनॉमी मुश्किल में है। अमेरिका, इंग्लैंड और यूरोप पर मंदी का खतरा मंडरा रहा है।
इकोनॉमिक ग्रोथ की तेज रफ्तार बनाए रखने पर होगा फोकस
एक्सपर्ट्स का कहना है कि मॉनेटरी पॉलिसी में सख्ती की वजह से इंटरेस्ट रेट काफी बढ़ गाय है। आने वाले समय में इंडिया की इकोनॉमिक ग्रोथ सुस्त पड़ने की भी आशंका भी जताई जा रही है। ऐसे में सरकार को ऐसे उपाय करने होंगे जो हमारी इकोनॉमी को ग्रोथ को सुस्त पड़ने से रोकेंगे। वित्त मंत्री ने पिछले महीने कहा था कि सरकार का फोकस पूंजीगत खर्च पर बना रहेगा। इस वित्त वर्ष में सरकार ने पूंजीगत खर्च के लिए 7.5 लाख करोड़ रुपये का टारगेट तय किया है। यह फाइनेशियल ईयर 2021-22 के संशोधित अनुमान से 24 फीसदी ज्यादा है।
पूंजीगत खर्च पर सरकार का जोर जारी रहेगा
पिछले हफ्ते चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर वी अनंत नागेशवरन ने कहा था कि सरकार के लिए पूंजीगत खर्च की मौजूदा रफ्तार को बनाए रखना मुश्किल होगा। उन्होंने कहा था कि पब्लिक सेक्टर के लिए कैपिटल इनवेस्टमेंट को मौजूदा स्तर पर बनाए रखने की जरूरत नहीं है। पूंजीगत खर्च में वृद्धि जारी रहेगी, लेकिन यह उतनी नहीं रहेगी जैसी अभी है। लेकिन, मौजूदा हालात को देखते हुए उम्मीद है कि पूंजीगत खर्च पर सरकार फोकस बनाए रखेगी।