Budget 2023: निर्मला सीतारमण के यूनियन बजट से ठीक पहले IMF ने सरकार को वित्तीय स्थिति ठीक करने की सलाह दी

Budget 2023: आईएमएफ ने यह भी कहा है कि इंडियन इकोनॉमी की सेहत अच्छी है। ग्लोबल इकोनॉमी में मुश्किल के बीच इंडिया उम्मीद की किरण जगाता है। फिर भी, सरकार को फिस्कल डेफिसिट में कमी का ठोस प्लान बनाना चाहिए। अभी सरकार का फिस्कल डेफिसिट बहुत ज्यादा है

अपडेटेड Dec 26, 2022 पर 9:51 AM
IMF की यह रिपोर्ट इसलिए काफी अहम है, क्योंकि यह वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के यूनियन बजट से कुछ ही हफ्ते पहले आई है। इकोनॉमिस्ट्स का भी कहना है कि फाइनेंस मिनिस्टर अगले फाइनेंशियल ईयर के लिए फिस्कल डेफिसिट का करीब 6 फीसदी का लक्ष्य तय कर सकती हैं।

Budget 2023: इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (IMF) ने सरकार को अपनी वित्तीय स्थिति ठीक करने की सलाह दी है। इंडिया में आईएमएफ के मिशन चीफ Nada Choueiri ने कहा है कि फाइनेंशियल ईयर 2025-26 तक फिस्कल डेफिसिट (Fiscal Deficit) के 4.5 फीसदी टारगेट को हासिल किया जा सकता है। पिछले दो-तीन साल में इंडिया का फिस्कल डेफिसिट काफी बढ़ा है। इसकी वजह यह है कि सरकार ने कोरोना की महामारी की वजह से अपना खर्च काफी बढ़ाया है। कई एक्सपर्ट्स का कहना है कि सरकार अब अपनी वित्तीय स्थिति को ठीक करने पर फोकस कर सकती है। फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) 1 फरवरी, 2023 को यूनियन बजट (Union Budget 2023) पेश करेंगी। इसमें वह फिस्कल डेफिसिट घटाने के उपायों का ऐलान कर सकती हैं।

ईयर 2027-28 तक फिस्कल डेफिसिट में 4 फीसदी तक की कमी हो सकती है

Choueiri ने कहा कि हमने कई स्थितियों को ध्यान में रख अथॉरिटीज को अपनी राय बताई है। इनमें सब्सिडी में रिफॉर्म्स, जीएसटी, एक्साइज टैक्स और इनकम टैक्सेज में एडिशिलन टैक्स रिफॉर्म्स शामिल हैं। उन्होंने कहा, "हमारा अनुमान है कि सरकार अब से लेकर फाइनेंशियल ईयर 2027-28 तक फिस्कल डेफिसिट में 4 फीसदी तक की कमी कर सकती है।" सरकार ने इस फाइनेंशियल ईयर के लिए फिस्कल डेफिसिट को जीडीपी के 6.4 फीसदी तक रखने का टारगेट तय किया है। सरकार इसे फाइनेंशियल ईयर 2025-26 तक घटाकर 4.5 फीसदी तक लाना चाहती है।


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सरकार को वित्तीय स्थिति ठीक करने के प्लान को बताना चाहिए

आईएमएफ ने अपनी रिपोर्ट में यह भी कहा है कि सरकार को मध्यम अवधि में फिस्कल कंसॉलिडेशन के प्लान के बारे में स्पष्ट रूप से बताना चाहिए। इस साल सामाजिक और आर्थिक रूप से समाज के कमजोर वर्ग पर ध्यान देने की जरूरत है। लेकिन, सरकार को फिस्कल कंसॉलिडेशन के लिए ठोस पॉलिसी बनाने और उस पर फोकस करने की जरूरत है। सरकार ने इस साल अपनी वित्तीय स्थिति ठीक करने पर थोड़ा ध्यान दिया है। अगले फाइनेंशियल ईयर में उसका फोकस और बढ़ने की उम्मीद है।

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अगले FY का फिस्कल डेफिसिट टारगेट 0.40% कम रह सकता है

IMF की यह रिपोर्ट इसलिए काफी अहम है, क्योंकि यह वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के यूनियन बजट से कुछ ही हफ्ते पहले आई है। इकोनॉमिस्ट्स का भी कहना है कि फाइनेंस मिनिस्टर अगले फाइनेंशियल ईयर के लिए फिस्कल डेफिसिट का करीब 6 फीसदी का लक्ष्य तय कर सकती हैं। यह इस फाइनेंशियल ईयर के तय टारगेट से 40 बेसिस प्वॉइंट्स कम होगा। लेटेस्ट डेटा के मुताबिक, इस साल अप्रैल-अक्टूबर के दौरान सरकार का फिस्कल डेफिसिट पूरे साल के टारगेट का 45.6 फीसदी रहा।

IMF ने इंडियन इकोनॉमी की अच्छी ग्रोथ का अनुमान जताया

आईएमएफ ने इंडिया की अच्छी वित्तीय स्थिति का जिक्र भी अपनी रिपोर्ट में किया है। उसने कहा है कि ग्लोबल इकोनॉमी में इंडिया उम्मीद की किरण के रूप में नजर आ रहा है। आईएमएफ ने फाइनेंशियल ईयर 2022-23 में इंडिया की जीडीपी ग्रोथ 6.8 फीसदी रहने की उम्मीद जताई है। उसने अगले फाइनेंशियल ईयर यानी 2023-24 के इकोनॉमिक ग्रोथ 6.1 फीसदी रहने का अनुमान जताया है।

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