Budget 2023: इनफ्लेशन का असर एफएमसीजी कंपनियों पर भी पड़ा है। कच्चे माल की कीमतें बढ़ने से कंपनियों के लिए प्रोडक्ट्स की कॉस्ट बढ़ गई है। प्रोडक्ट्स के प्राइसेज बढ़ाने से बचने के लिए कंपनियों ने उनके वजन घटाए हैं। कंपनियां अब अपना मार्जिन और वॉल्यूम बढ़ाने के बारे में सोच रही हैं। उन्हें 2023 में ग्रामीण इलाकों में मांग में सुधार आने की उम्मीद है। एफएमसीजी कंपनियों की कुल बिक्री में ग्रामीण इलाकों की एक-तिहाई से ज्यादा हिस्सेदारी है। एफएमसीजी कंपनियों को उम्मीद है कि अगले यूनियन बजट (Union Budget 2023) में सरकार डिमांड बढ़ाने के उपाय कर सकती है। इससे उनके प्रोडक्ट्स की डिमांड बढ़ेगी। फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) 1 फरवरी, 2023 को यूनियन बजट पेश करेंगी। यह 2024 के लोकसभा चुनावों से पहले मोदी सरकार का अंतिम पूर्ण बजट होगा।
सितंबर तिमाही में 0.9% घटा था वॉल्यूम
डाबर इंडिया के सीईओ मोहित मल्होत्रा ने कहा, "हमें साल 2023 से बहुत उम्मीद है। इस साल ग्रामीण इलाकों में मांग में मजबूती देखने को मिल सकती है। शहरों इलाकों में भी मांग अच्छी बनी रहेगी। मॉडर्न ट्रेड और ई-कॉमर्स जैसे उभरते चैनलों की मदद से बिक्री अच्छी रह सकती है।" एफएमसीजी इंडस्ट्री 2022 में प्राइस में डबल डिजिट बढ़ोतरी देख चुकी है। NielsonIQ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, सितंबर तिमाही में एफएमसीजी इंडस्ट्री के कुल वॉल्यूम में 0.9 फीसदी की कमी आई थी।
कमोडिटी की कीमतों में नरमी से होगा फायदा
इमामी के वाइस चेयरमैन मोहन गोयनका ने कहा कि हाई इनफ्लेशन और रूरल स्लेडाउन चिंता की वजह है। लेकिन, कमोडिटी की कीमतों में नरमी से थोड़ी राहत मिल सकती है। उन्होंने कहा, "अक्टूबर के बाद से कमोडिटी की कीमतों में नरमी दिख रही है। हालांकि, इसके फायदे अगले फाइनेंशियल ईयर से ही मिलने शुरू होंगे। उम्मीद है कि सरकार की पॉलिसी और फॉर्म इनकम बढ़ने से 2023 में ग्रामीण इलाकों में फिर से मांग बढ़ सकती है।"
यह भी पढ़ें : बजट 2023: कॉमर्स मिनिस्ट्री ने निर्मला सीतारमण को गोल्ड पर इंपोर्ट ड्यूटी घटाने की सलाह दी
रूरल डिमांड इस साल मजबूत रहने की उम्मीद
ब्रिटानिया इंडस्ट्रीज के एग्जिक्यूटिव वाइस-चेयरमैन एंड मैनेजिंग डायरेक्टर वरूण बेरी ने कहा कि कोरोना के बाद मांग अब व्यवस्थित हो रही है। हालांकि, जहां तक कॉस्ट और प्रॉफिटिबिलिटी का सवाल है तो आटा और दूध की कीमतों में उछाल की वजह से इनफ्लेशन का असर बना रह सकता है। सभी कमोडिटीज की कीमतों में नरमी नहीं है। हालांकि हमें उम्मीद है कि आगे इनमें नरमी आएगी। अभी पाम ऑयल एकमात्र ऐसी कमोडिटीज जिसकी कीमतों में नरमी है। आटा की कीमत बढ़ रही है। शुगर के प्राइसेज स्टेबल बने हुए हैं। उम्मीद है कि आगे चीजें नियंत्रण में आ जाएंगी।