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Budget 2023: एग्रीकल्चर में R&D के लिए ज्यादा आवंटन से बढ़ेगी कृषि उत्पादकता, ये दो उदाहरण देखें

Budget 2023: कृषि क्षेत्र में अनुसंधान एवं विकास (R&D) के लिए ज्यादा आवंटन से न सिर्फ कृषि उत्पादकता बढ़ती है बल्कि इससे किसानों की आय में भी जबर्दस्त इजाफा होता है। साथ ही एग्री प्रोडक्ट्स का एक्सपोर्ट भी बढ़ता है। फूड सिक्योरिटी को देखते हुए कृषि उत्पादकता बढ़ाना बहुत जरूरी है

Vivian Fernandesअपडेटेड Jan 09, 2023 पर 2:35 PM
Budget 2023: एग्रीकल्चर में R&D के लिए ज्यादा आवंटन से बढ़ेगी कृषि उत्पादकता, ये दो उदाहरण देखें
उम्मीद है कि फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण यूनियन बजट में एग्री सेक्टर में आरएंडडी के लिए बजट आवंटन में अच्छी वृद्धि करेंगी।

Budget 2023: एग्रीकल्चर में रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) पर इनवेस्टमेंट बढ़ाने से कई तरह से फायदा होता है। कृषि उत्पादकता बढ़ती है। लॉस घटता है। किसानों की इनकम बढ़ती है। इसलिए इस बजट में कृषि क्षेत्र में आरएंडडी के लिए आवंटन बढ़ाने की जरूरत है। आरएंडडी के कई फायदे बताने के लिए मैं दो उदाहरण पेश कर सकता हूं। करीब एक दशक तक उत्तर भारत में Co 0238 किसानों के लिए गन्ना की पसंदीदा वेरायटी थी। इसे 1997-2009 के बीच इंडियन काउंसिल ऑफ एग्रीकल्चरल रिसर्च (ICAR) के दो शुगरकेन ब्रीडिंग सेंटर में विकसित किया गया था। इसे विकसित करने वाले बख्शी राम के मुताबिक, 2020 के प्राइसेज पर इस पर 347 करोड़ रुपये की कॉस्ट आई थी। यह दोनों इंस्टीट्यूट्स के कई सालों के बजट के बराबर था। इसे 2009 में मार्केट में पेश किया गया। तब से लेकर 2020 तक पांच उत्तरी राज्यों में 53 फीसदी गन्ना उत्पादक क्षेत्रों में इसका इस्तेमाल हो रहा है। इनमें उत्तर प्रदेश और बिहार शामिल हैं। इस गन्ने के इस्तेमाल से ज्यादा चीनी बनती है। राम का अनुमान है कि इस वेरायटी के इस्तेमाल से अतिरिक्त 67,110 करोड़ रुपये का रेवेन्यू हो चुका है।

दिल्ली के इंडियन एग्रीकल्चर रिसर्च इंस्टीट्यूट (IARI) में विकसित पूसा बासमती की वेरायटी की कहानी भी गन्ने की Co 0238 जैसी है। यह जानकर आप चौंक सकते हैं कि एक समय ऐसा था जब किसानों को सामान्य चावल की खेती में ज्यादा मुनाफा दिखता था और वे बासमती की खेती से दूरी बना रहे थे। इस ट्रेंड में बदलाव के लिए बासमती की खेती के लिए ज्यादा मुनाफा वाली बनना जरूरी था। पूसा वेरायटी 1989 में आई। इसे विकसित करने में 24 साल लगे। सामान्य चावल से 40 सेमी छोटी इस वेरायटी की तब ज्यादा मांग नहीं थी। 14 साल बाद 2003 में IARI ने PB 1121 वेरायटी जारी की। अब बासमती इंडिया का टॉप एग्रीकल्चरल एक्सपोर्ट बन गया है। 2010-16 के बीच देश में बासमती उत्पादक इलाकों के 68 फीसदी हिस्सों में इसकी खेती हो रही है। IARI के अनुमान के मुताबिक, पिछले सालों में इसमें हुए कारोबार की वैल्यू 1.5 लाख करोड़ रुपये है। तब से जल्द तैयार होने वाले और बैक्टिरिया प्रतिरोधी कई नए वर्जन आ चुके हैं। आधुनिक टेक्नोलॉजी की मदद से इन्हें काफी समय में विकसित किया गया है।

फूड सिक्योरिटी पर नजर

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