Budget 2023 : बजट पेश होने में अब चंद दिन शेष बचे हैं। इस बीच, हेलिओस कैपिटल (Helios Capital) के फाउंडर और फंड मैनेजर समीर अरोड़ा (Samir Arora) ने इस यूनियन बजट में बड़े लोकलुभावन ऐलान नहीं होने के संकेत दिए हैं। उन्होंने कहा कि बजट काफी हद तक नॉन इवेंट रहेगा यानी कोई बड़ा ऐलान होने की उम्मीद कम ही है। उन्होंने कहा कि काफी हद तक रिफॉर्म्स हो चुके हैं यानी कदम उठा लिए गए हैं। हमें अचानक यानी हैरत में डालने वाली घोषणाओं की जरूरत नहीं है। वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को यूनियन बजट पेश करने जा रही हैं।
एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने इन बिंदुओं पर राय दी कि बजट का पॉलिसीमेकर्स के लिए क्या मतलब है, बजट के जरिये सरकार ग्रोथ को रफ्तार देने के लिए क्या कर सकती है।
एडलवाइस एसेट मैनेजमेंट की क्या हैं उम्मीदें
उधर, एडलवाइस एसेट मैनेजमेंट (Edelweiss Asset Management) के त्रिदीप भट्टाचार्य ने कहा कि इस बजट में फिस्कल कंसोलिडेशन के अलावा निवेशकों की नजर तीन और अहम फैक्टर्स पर होगी।
मनी कंट्रोल से बात करते हुए उन्होंने आगे कहा कि 2023 का बजट स्पेशल बजट होगा। ये 2024 में होने वाले आम चुनाव के पहले का आखिरी पूर्ण बजट होगा। इतिहास पर नजर डालें तो इलेक्शन के पहले के साल के बजट में अक्सर पॉपुलिस्ट देखने को मिलते हैं। हालांकि साल 2018 में ऐसा देखने को नहीं मिला था। ऐसे में यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि 1 फरवरी को आने वाले बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण फिस्कल कंसोलिडेशन, रिफॉर्म, रेनेव्यू बढ़ाने और ग्रोथ पर होने वाले खर्च को बढ़ाने के बीच संतुलन साधती नजर आएंगी।
उन्होंने आगे कहा कि इस बजट में इक्विटी निवेशकों का फोकस 3 अहम फैक्टर पर होगा। इनमें से पहला है फिस्कल कंसोलिडेशन। सरकार का लक्ष्य है कि वित्तीय घाटे को वित्त वर्ष 2026 तक जीडीपी के 4.5 फीसदी तक होना चाहिए। निवेशकों की नजर होगी कि सरकार अपने लक्ष्य के लिए इस बजट में क्या कर सकती है। इसके अलावा बजट में विनिवेश के टारगेट और इसमें तेजी लाने के लिए क्या किया जाता है, इस पर भी निवेशकों की नजर रहेगी। रूरल डिमांड को बढ़ावा देने के लिए और पीएलआई स्कीम के विस्तार पर सरकार क्या निर्णय लेती है, इस पर भी बाजार की नजर रहेगी।
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