बजट 2023: NASSCOM ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) से रोजगार के मौके बनाने और स्टार्टअप्स (Startups) को बढ़ावा देने के लिए टैक्स में रियायत की मांग की है। आईटी इंडस्ट्री का प्रतिनिधित्व करने वाली इस संस्था का मानना है कि वित्तमंत्री 1 फरवरी को पेश होने वाले बजट में इन उपायों का ऐलान कर सकती है। उसने कहा है कि सरकार को शर्तें पूरी करने वाले स्टार्टअप्स को मिनिमम अल्टरनेट टैक्स (MAT) में रियायत देनी चाहिए। सरकार को उन स्टार्टअप्स को भी ईसॉप्स टैक्स के डेफरमेंट की सुविधा देनी चाहिए, जिनके पास इंटर-मिनिस्ट्रियल बोर्ड सर्टिफिकेट (IMB Certificate) नहीं है। हालांकि, इसके लिए सरकार कुछ शर्तें तय कर सकती है। लेकिन, हर स्टार्टअप के लिए इसके लिए अनुमति लेना जरूरी नहीं होना चाहिए।
ईसॉप्स पर टैक्स पेमेंट के डिफरेमेंट की इजाजत मिलनी चाहिए
नैस्कॉम की सलाह है कि डेफरमेंट फैसिलिटी DPIIT रजिस्टर्ड स्टार्टअप्स के एंप्लॉयीज को भी मिलनी चाहिए। उसने कहा है कि एलिजिबल ईसॉप्स सिर्फ इंडियन रेजिडेंट टैक्सपेयर्स को ऑफर किए जाने चाहिए। ईसॉप्स की शर्तें भी सभी एंप्लॉयीज के लिए एक जैसी होनी चाहिए। 2020 में सरकार ने DPIIT रजिस्टर्ड उन स्टार्टअप्स के लिए ईसॉप्स पर टैक्स पेमेंट के डेफरमेंट की इजाजत दी थी, जिनके पास IMB सर्टिफिकेट था।
फाइनेंस एक्ट, 2022 में संशोधन का प्रस्ताव वापल लेने की जरूरत
उसने कहा है कि सराकर को फाइनेंस एक्ट, 2022 में पेश संशोधन को भी वापस ले लेना चाहिए। इस संशोधन के बाद स्टार्टअप्स के लिए इनकम का सोर्स बताना जरूरी हो गया है। नैस्कॉम का कहना है कि इस संशोधन की वजह से दोस्तों और फैमिली के लिए स्टार्टअप्स को पैसे उधार देना मुश्किल हो गया है। अगर इस संशोधन को वापस लिया जाता है तो इससे कंप्लायंस में सुविधा होगी और विवाद से बचने में भी मदद मिलेगी।
इनकम का स्रोत बताने से मिले छूट
इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 68 के तहत पैसे का नेचर और सोर्स को तभी एक्सप्लेंड माना जाएगा जब क्रेडिटर के लिए भी फंड का सोर्स बताया गया हो। नैस्कॉम का कहना है कि प्री-स्टेज स्टार्टअप्स आम तौर पर दोस्तों और परिवार से पैसे कर्ज के रूप में लेते है। इस तरह की इनकम का सोर्स बताने की अनिवार्यता से उनके लिए यह कर्ज देना मुश्किल हो जाता है।
नैस्कॉम ने कहा है कि शर्तें पूरी करने वाले स्टार्टअपस के लिए MAT में कमी करने की जरूरत है। इसे 15 फीसदी से घटाकर 9 फीसदी किया जाना चाहिए। मैट के प्रावधानों में किसी तरह की सीमा तय नहीं है। छोटी-बड़ी सभी आकार की कंपनियां इस टैक्स के दायरे में आती हैं। इसलिए स्टार्टअप्स भी इस टैक्स के दायरे में आते हैं। इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 80IAC से छूट का दावा करने के बाद भी उन्हें यह टैक्स चुकाना होता है।