बजट 2023 : सरकार की वित्तीय स्थिति ठीक करने पर होगा वित्त मंत्री का फोकस

Budget 2023: कोरोना की महामारी के दौरान इकोनॉमी को सपोर्ट करने के लिए सरकार ने अपना खर्च बढ़ाया था। इससे फाइनेंशियल ईयर 2020-21 में इसका फिस्कल डेफिसिट बहुत बढ़ गया। इसके फाइनेंशियल ईयर 202-22 और 2022-23 में भी काफी ज्यादा रहने की उम्मीद है

अपडेटेड Jan 02, 2023 पर 11:23 AM
वित्त मंत्री कई बार कह चुकी है कि ग्लोबल इकोनॉमी की लेकर अनिश्चितता के बावजूद सरकार वित्त वर्ष 2025-26 कतरक फिस्कल डेफिसिट को जीडीपी के 4.5 फीसदी तक लाना चाहती है।

बजट 2023 : फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) 1 फरवरी, 2023 को यूनियन बजट (Union Budget) पेश करेंगी। यह बजट ऐसे वक्त आ रहा है, जब इंडियन इकोनॉमी की हालत अमेरिका, इंग्लैंड जैसे देशों से बेहतर है। ऐसे में इस बजट का फोकस ग्रोथ बढ़ाने वाले उपायों पर रहने की उम्मीद है। लेकिन, रायटर्स के पोल के नतीजों से पता चलता है कि इस बजट में वित्त मत्री का फोकस फिस्कल कंसॉलिडेशन (Fiscal Consolidation) पर होगा। इस पोल में कई इकोनॉमिस्ट्स ने हिस्सा लिया। उनका मानना था कि आगे इंडियन इकोनॉमी की ग्रोथ सुस्त पड़ सकती है। ऐसे में ज्यादा खर्च करने की सरकार की क्षमता पर असर पड़ सकता है। 2020 के बाद सरकार ने कोरोना की महामारी के बीच इकोनॉमी को सपोर्ट करने के लिए अपना खर्च काफी बढ़ाया था।

इस फाइनेंशियल ईयर में फिस्कल डेफिसिट 6.4 फीसदी रहने की उम्मीद

केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार का जोर शुरू से ही फिस्कल कंसॉलिडेशन पर रहा है। लेकिन, कोरोना की महामारी की वजह से फिस्कल कंसॉलिडेशन पर उसका फोकस कम हो गया। ज्यादा खर्च करने की वजह से फाइनेंशियल ईयर 2020-21 में सरकार का फिस्कल डेफिसिट बढ़कर जीडीपी के 9.3 फीसदी पर पहुंच गया। फाइनेंशियल ईयर 2021-22 में फिस्कल डेफिसिट 6.9 फीसदी और 2022-23 में 6.4 फीसदी रहने की उम्मीद है। अगले फाइनेंशियल ईयर में इसमें और कमी आ सकती है।


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सरकार के पास खर्च बढ़ाने की ज्यादा गुंजाइश नहीं होगी

कोटक महिंद्रा बैंक की चीफ इकोनॉमिस्ट उपासना भारद्वाज ने कहा कि ग्लोबल इकोनॉमिक स्लोडाउन हमारे लिए चिंता की बात है। इसका असर इंडियन इकोनॉमी पर पड़ेगा। इसलिए ग्रोथ बढ़ाने के लिए खर्च को बढ़ाने की गुंजाइश सीमित होगी। उन्होंने कहा कि सरकार का फोकस कैपिटस एक्सपेंडिचर पर हो सकता है। हालांकि, यह काफी हद तक टैक्स कलेक्शन पर निर्भर करेगा। इस साल टैक्स कलेक्शन में देखे जा रहे उछाल के अगले फाइनेंशियल ईयर में जारी रहने की उम्मीद नहीं है।

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सरकार वित्त वर्ष 2025-26 तक फिस्कल डेफिसिट को 4.5 फीसदी तक लाना चाहती है

रायटर्स के पोल में कुल 35 इकोनॉमिस्ट्स ने हिस्सा लिए। इनमें से 80 फीसदी से ज्यादा का मानना था कि निर्मला सीतारमण का फोकस अगले बजट में फिस्कल कंसॉलिडेशन पर रहेगा। वित्त मंत्री कई बार कह चुकी है कि ग्लोबल इकोनॉमी की लेकर अनिश्चितता के बावजूद सरकार वित्त वर्ष 2025-26 तक फिस्कल डेफिसिट को जीडीपी के 4.5 फीसदी तक लाना चाहती है। फिस्कल डेफिसिट पर सरकार के फोकस की एक वजह इंडिया का सॉवरेन क्रेडिट रेटिंग भी है, जो अभी BBB-है। यह जंक स्टेटस से सिर्फ एक दर्जा ऊपर है।

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