बजट 2023: सरकार का फोकस रेलवे के आधुनिक बनाने और यात्रियों को बेहतर सुविधाएं देने पर है। पिछले कुछ सालों से सरकार रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर (Railway Infrastructure) को बेहतर बनाने पर काफी निवेश कर रही है। सरकार की योजना ज्यादा संख्या में वंदे भारत (Vande Bharat Trains) ट्रेनें चलाने की है। सूत्रों का कहना है कि 1 फरवरी को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) 300-400 वंदे भारत ट्रेनों का ऐलान कर सकती हैं। वंदे भारत सेमी-हाई स्पीड ट्रेनें (Semi High-speed trains) हैं। अभी कुछ रूटों पर यह ट्रेनें चलाई जा रही हैं। सरकार दूसरे रूटों पर भी यह ट्रेन चलना चाहती है। इससे यात्रियों को एक जगह से दूसरी जगह जाने में कम समय लगेगा। साल 2017 से रेल बजट अलग से पेश नहीं होता है। फाइनेंस मिनिस्टर यूनियन बजट के साथ रेलवे के आय-व्यय का भी ब्योरा देती हैं। वह रेलवे की नई योजनाओं का भी ऐलान करती हैं।
वंदे भारत ट्रेनों की स्पीड राजधानी और शताब्दी के मुकाबले ज्यादा
अभी राजधानी (Rajdhani) और शताब्दी (Shatabdi) रेलवे की सबसे तेज रफ्तार से चलने वाली ट्रेनें हैं। सरकार की योजना इनकी जगह वंदे भारत ट्रेनों को चलाने की है। इसकी वजह यह है कि वंदे भारत ट्रेनों की स्पीड राजधानी और शताब्दी के मुकाबले ज्यादा है। वंदे भारत की मैक्सिमम स्पीड 180 किलोमीटर प्रति घंटा है। इससे लंबी दूरी के सफर में लगने वाला समय काफी कम हो जाएगा। सरकार की योजना अगले वित्त वर्ष में करीब 100 वंदे भारत ट्रेनों का उत्पादन करने की है।
वंदे भारत ट्रेनों के निर्यात की योजना
सरकार अगर बजट में 300-400 वंदे भारत ट्रेनों का ऐलान करती है तो इसका मतलब है कि आने वाले सालों में इन ट्रेनों की मैन्युफैक्चरिंग युद्ध स्तर पर होगी। इससे इंडिया भी उन देशों की बराबरी में आ जाएगा, जहां ट्रेनों की स्पीड 180 किलमीटर प्रति घंटा या इससे अधिक है। सरकार की योजना वंदे भारत ट्रेनों के निर्यात की भी है। बताया जाता है कि सरकार फाइनेंशियल ईयर 2025-26 से इन ट्रेनों का निर्यात शुरू कर सकती है।
वंदे भारत का स्लीपर वर्जन भी आएगा
अभी जो वंदे भारत ट्रेनें चलाई जा रही है, उनमें पैसेंजर्स बैठकर यात्रा करते हैं। सरकार जल्द वंदे भारत ट्रेनों का स्लीपर वर्जन लाना चाहती है। लंबी दूरी के सफर के लिए वंदे भारत ट्रेनों का स्लीपर वर्जन जरूरी है। इससे नई दिल्ली से बेंगलुरु, नई दिल्ली से हैदराबाद, नई दिल्ली से चेन्नई जैसी लंबी दूरी के यात्रियों को काफी फायदा होगा। अभी इन यात्रियों को राजधानी और दुरंतो ट्रेनों का इस्तेमाल करना पड़ता है।