Budget 2023: फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) के अगले यूनियन बजट (Union Budget 2023) से नौकरीपेशा लोगों को काफी उम्मीदें हैं। उनका कहना है कि 2020 में कोरोना की महामारी शुरू होने के बाद से उनके सामने कई मुश्किलें आई हैं। सरकार उनके लिए राहत का ऐलान अगले बजट में कर सकती है। फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण 1 फरवरी, 2023 को यूनियन बजट पेश करेंगी। इसमें वह टैक्स में राहत के साथ ही रेट में भी कमी कर सकती हैं। नौकरीपेशा लोगों का यह भी कहना है कि सरकार ने फाइनेंशियल ईयर 2019-20 के बजट में टैक्स की नई रीजीम का ऐलान किया था। इसमें टैक्स-छूट और डिडक्शन वापस ले लिया गया है। लेकिन, टैक्स का रेट घटा दिया गया है। बहुत कम टैक्सपेयर्स ने इसमें दिलचस्पी दिखाई है। इसलिए सरकार को इसे अट्रैक्टिव बनाने के लिए कदम उठाने चाहिए।
पिछले कई साल से इनकम टैक्स में बदलाव नहीं
पर्सनल इनकम टैक्स की दरों में 2017-18 से कोई बदलाव नहीं किया गया है। इसलिए उम्मीद की जा रही है कि सरकार टैक्सपेयर्स को राहत देने के लिए बजट में ऐलान करेगी। एक्सपर्ट्स का कहना है कि सरकार को इनकम टैक्स से छूट की आय सीमा बढ़ाने की जरूरत है। अभी 2.5 लाख रुपये तक सालाना आय को इनकम टैक्स से छूट हासिल है। सरकार को इस सीमा को बढ़ाकर सालाना 5 लाख रुपये कर देनी चाहिए। इस कदम से बड़ी संख्या में टैक्सपेयर्स को फायदा होगा।
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अभी टैक्स रेट बहुत ज्यादा है
अभी इनकम टैक्स के सबसे ज्यादा रेट वाले स्लैब में सरचार्ज के साथ टैक्स का रेट 42.74 फीसदी हो जाता है। दूसरे देशों खासकर पड़ोसी देशों से तुलना करने पर यह बहुत ज्यादा है। सिंगापुर में यह 17 फीसदी है जबकि मलेशिया में 30 फीसदी है। सरकार इसमें कमी कर टैक्सपेयर्स को राहत दे सकती है। टैक्स में कमी करने से टैक्स कंप्लायंस भी बढ़ेगा।
स्टैंडर्ड डिडक्शन बढ़ाने का हो सकता है ऐलान
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण स्टैंडर्ड डिडक्शन भी बढ़ा सकती हैं। अभी नौकरी करने वाले लोगों को सालाना 50,000 रुपये डिडक्शन की इजाजत है। इसे बढ़ाकर सालाना 1 लाख रुपये किया जा सकता है। इससे लोगों पर टैक्स का बोझ कम होगा। उनके हाथ में ज्यादा पैसे बचेंगे। इससे डिमांड बढ़ाने में मदद मिलेगी।
सेक्शन 80सी की लिमिट भी बढ़ाई जाए
सरकार को इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 80सी के तहत डिडक्शन की लिमिट को भी बढ़ाना चाहिए। अभी इस सेक्शन के तहत अधिकतम 1.5 लाख रुपये डिडक्शन की इजाजत है। इसमें फाइनेंशियल ईयर 2014-15 से कोई बदलाव नहीं हुआ है। सरकार को इसमें बदलाव करने की जरूरत है। इस लिमिट को बढ़ाकर सालाना 3 लाख रुपये किजा जा सकता है। इससे लोगों को ज्यादा सेविंग्स करने में मदद मिलेगी। साथ ही इससे टैक्स कंपलायंस भी बढ़ेगा।
हेल्थ पॉलिसी पर ज्यादा डिडक्शन मिले
हेल्थ पॉलिसी पर डिडक्शन की लिमिट को भी बढ़ाए जाने की जरूरत है। अभी 60 साल से कम उम्र होने पर सालाना 25 हजार रुपये तक के प्रीमियम पर डिडक्शन की इजाजत है। 60 साल से ज्यादा के लोगों को सालाना 50 रुपये तक के डिडक्शन की इजाजत है। पिछले कुछ सालों खासकर कोरोना की महामारी के बाद हेल्थ पॉलिसी का प्रीमियम बहत बढ़ गया है। इसलिए सरकार को इस लिमिट को बढ़ा देन चाहिए।