Budget 2023: अगले फाइनेंशियल ईयर का डिसइनवेस्टमेंट टारगेट घटा सकती हैं निर्मला सीतारमण

union budget 2023: पिछले कई साल से डिसइनवेस्टमेंट टारगेट हासिल करने से चूक जाने के बाद उम्मीद है कि सरकार अगले फाइनेंशियल ईयर के लिए व्यावहारिक टारेगट तय करेंगी। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण अगले फाइनेंशियल ईयर के लिए 40,000 करोड़ रुपये तक टारगेट तय कर सकती हैं

अपडेटेड Dec 28, 2022 पर 11:02 AM
सरकार ने इस फाइनेंशियल ईयर के लिए डिसइनवेस्टमेंट का 65,000 करोड़ रुपये का टारगेट रखा था। इसके मुकाबले डिसइनवेस्टमेंट से अब तक जुटाई गई रकम काफी कम है।

Budget 2023: सरकार यूनियन बजट (Union Budget) में डिसइनवेस्टमेंट का टारगेट (disinvestment target) घटा सकती है। इस फाइनेंशियल ईयर (2022-23) में सरकार लगातार चौथी बार डिसइनवेस्टमेंट टारगेट हासिल करने से चूक सकती है। सरकार ने इस फाइनेंशियल ईयर के लिए डिसइनवेस्टमेंट का 65,000 करोड़ रुपये का टारगेट रखा था। इसके मुकाबले डिसइनवेस्टमेंट से अब तक जुटाई गई रकम काफी कम है। ऐसे में माना जा रहा है कि सरकार अगले फाइनेंशियल ईयर (2023-24) के लिए 30,000-40,000 करोड़ रुपये का टारगेट तय कर सकती है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) 1 फरवरी, 2023 को यूनियन बजट पेश करेंगी। वित्त मंत्री पर ज्यादा खर्च के लिए सरकार की इनकम बढ़ाने का चैलेंज है।

इस वित्त वर्ष टारगेट हासिल नहीं कर पाएगी सरकार

सरकार ने फाइनेंशियल ईयर 2022-23 के लिए डिसइनवेस्टमेंट का टारगेट 2021-22 के मुकाबले कम तय किया था। इसकी वजह यह है कि सरकार फाइनेंशियल ईयर 2021-22 का डिसइनवेस्टमेंट टारगेट काफी ज्यादा तय किया था। लेकिन, वह इसे हासिल नहीं कर सकी थी। एक्सपर्ट्स का कहना है कि सरकार अगले फाइनेंशियल ईयर के लिए डिसइनवेस्टमेंट का व्यावहारिक टारगेट तय करना चाहती है। उम्मीद है यह टारगेट 40,000 करोड़ रुपये तक रह सकता है।


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सरकार सिर्फ 25,000 करोड़ ही जुटा सकी है

सरकार ने फाइनेंशियल ईयर में 2021-22 में डिसइनवेस्टमेंट के लिए 1.75 लाख करोड़ रुपये का टारगेट तय किया था। इसके मुकाबले वह सिर्फ 13,530 करोड़ रुपये जुटा सकी थी। इसकी बड़ी वजह कोरोना की महामारी थी। हालांकि, संशोधित बजट अनुमान में इसे घटाकर 78,000 करोड़ रुपये कर दिया गया था। इस फाइनेंशियल ईयर के लिए सरकार ने 65,000 करोड़ रुपये का टारगेट तय किया है। लेकिन, अब तक वह करीब 25,000 करोड़ रुपेय ही जुटा चुकी है। इसमें LIC के आईपीओ से जुटाई गई रकम भी शामिल है।

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विनिवेश की सूची में कई कंपनियां शामिल

सरकार ने कई कंपनियों में हिस्सेदारी बेचने का प्लान तैयार कर रखा है। इनमें IDBI Bank, SCI, BEML और CCI जैसी बड़ी कंपनियां शामिल हैं। सरकार आईडीबीआई बैंक में हिस्सेदारी बेचने की तैयारी कर रही है। लेकिन, माना जा रहा है कि इस फाइनेंशियल ईयर में यह मुमकिन नहीं होगा। बताया जाता है कि HLL Lifecare में डिसइनवेस्टमेंट का प्रोसेस काफी आगे बढ़ चुका है। लेकिन, इसके बावूजद डिसइनवेस्टमेंट से जुटाई गई रकम टारगेट से बहुत कम रह सकती है।

सरकार भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन में रणनीतिक विनिवेश के प्लान को टाल चुकी है। इससे सरकार को 50,000-60,000 करोड़ रुपये जुटाए जाने की उम्मीद थी। CEL में रणनीतिक विनिवेश के प्लान को भी टाला जा चुका है। पवन हंस में विनिवेश की योजना भी अटकी हुई दिख रही है। रणनीतिक विनिवेश का मतलब है सरकार का कंपनी में अपनी पूरी हिस्सेदारी को बेचना।

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