Budget 2023: इस बार वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) बजट में टैक्सपेयर्स के लिए बड़ा ऐलान कर सकती हैं। वह इनकम टैक्स, 1961 के सेक्शन 80सी की डिडक्शन लिमिट बढ़ा सकती हैं। अभी इसकी लिमिट एक फाइनेंशियल ईयर में 1.5 लाख रुपये है। इसे बढ़ाकर 2.5 लाख रुपये किया जा सकता है। इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (ICAI) ने वित्त मंत्री को सेक्शन 80सी की लिमिट बढ़ाने की सलाह दी है। उसने कहा है कि इस लिमिट को बढ़ाने से टेक्सपेयर्स को फायदा होगा। उन्हें ज्यादा सेविंग्स करने का मौका मिलेगा। कई दूसरी एसोसिएशंस ने भी निर्मला सीतारमण से सेक्शन 80सी के तहत डिडक्शन की लिमिट को बढ़ाने की सलाह दी है। उनका कहना है कि पिछले कई सालों से इस लिमिट को बढ़ाया नहीं गया है।
8 साल पहले बढ़ाई गई थी लिमिट
फाइनेंशियल मार्केट भी लंबे समय से सेक्शन 80सी की लिमिट बढ़ाने की मांग कर रहा है। इसे आखिरी बार 2014-15 में बढ़ाया गया था। तबक इसे 1 लाख रुपये से बढ़ाकर 1.5 लाख रुपये किया गया था। इस लिमिट का मतलब यह है कि सेक्शन 80सी के तहत आने वाले इनवेस्टमेंट ऑप्शन में एक फाइनेंशियल ईयर में मैक्सिमम 1.5 लाख रुपये तक निवेश कर टैक्स डिडक्शन का दावा किया जा सकता है। इस सेक्शन के तहत करीब एक दर्जन इनवेस्टमेंट ऑप्शन शामिल हैं। इनमें पीपीएफ, ELSS, सुकन्या समृद्धि, लाइफ इंश्योरेंस, बच्चों की ट्यूशन फीस आदि शामिल हैं। हालांकि, यह ध्यान रखना होगा कि डिडक्शन की यह सुविधा सिर्फ उन टैक्सपेयर्स को मिलती है, जिन्होंने इनकम टैक्स की ओल्ड रीजीम को सेलेक्ट किया है।
यह भी पढ़ें : बजट 2023: इनकम टैक्स में बदलाव का हो सकता है ऐलान, Exemption लिमिट बढ़ाकर 5 लाख रुपए तक करने की उम्मीद
पीपीएफ में कंट्रिब्यूशन लिमिट भी बढ़ने की उम्मीद
आईसीएआई ने PPF कंट्रिब्यूशन की सालाना लिमिट को भी बढ़ाने की मांग फाइनेंस मिनिस्टर से की है। अभी इसकी लिमिट 1.5 लाख रुपये है। उसने कहा है कि वित्त मंत्री को 1 फरवरी, 2023 को पेश होने वाले बजट में इसे बढ़ाकर 3 लाख रुपये कर देनी चाहिए। उसने कहा है कि चूंकि पीपीएफ का इस्तेमाल सेविंग्स के लिए बड़ी संख्या में टैक्सपेयर्स करते हैं, इसलिए इसे बढ़ाने से लोगों को बड़ी राहत मिलेगी।
मेडिकल एक्सपेंसेज के लिए अलग से डिडक्शन की मांग
उसने कहा है कि पीपीएफ में इनवेस्टमेंट की सालाना 1.5 लाख रुपये की लिमिट पिछले कई सालों से बढ़ाई नहीं गई है। उसने यह भी कहा है कि हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम पर फुल डिडक्शन की इजाजत होनी चाहिए। साथ ही मेडिकल एक्सपेंसेज के लिए अलग से डिडक्शन की सुविधा मिलनी चाहिए। इससे लोगों के बीच सोशल सिक्योरिटी कवर बढ़ाने में मदद मिलेगी। बड़ी संख्या में लोग इलाज के लिए प्राइवेट अस्पताल जाना पसंद करते हैं। इन अस्पतालों में इलाज काफी महंगा है। उसने वित्त मंत्री से सेक्सन 80DDB के तहत मिलने वाले डिडक्शन की लिमिट बढ़ाने की भी मांग की है। इस सेक्शन के तहत कुछ खास बीमारियों के इलाज पर हुए खर्च के डिडक्शन की सुविधा मिलती है।