बजट 2023: फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) के प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PMJAY) का आवंटन यूनियन बजट (Union Budget) में बढ़ाने की उम्मीद है। वित्त मंत्री 1 फरवरी, 2023 को बजट पेश करेंगी। पिछले बजट में उन्होंने इस योजना के लिए 6,400 करोड़ रुपये का ऐलान किया था। एक्सपर्ट्स का मानना है कि कोरोना की महामारी धीरे-धीरे खत्म हो रही है। इसलिए अगले बजट में पीएमजेएवाई के लिए आवंटन ज्यादा बढ़ने की उम्मीद नहीं है। हालांकि, नेशनल हेल्थ अथॉरिटी (NHA) ने फाइनेंस मिनिस्टर से इस योजना के लिए आवंटन 400-500 करोड़ रुपये बढ़ाने की मांग की है। एनएचए इस योजना को लागू करने वाली टॉप एजेंसी है। दूसरे एक्सपर्ट्स का भी कहना है कि इस बारे में बजट में हेल्थ से संबंधित योजनाओं के आवंटन में मामूली बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।
अब तक खर्च हो चुके हैं 4100 करोड़ रुपये
मामले की जानकारी रखने वाले एक सूत्र ने बताया कि फाइनेंशियल ईयर 2023-24 के लिए पीएमजेएवाई के बजट में 500 करोड़ रुपये तक का इजाफा देखने को मिल सकता है। इससे राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में इस योजना को बेहतर तरीके से लागू करने में मदद मिलेगी। चालू वित्त वर्ष के लिए इस योजना के तय बजट में से 4,100 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं। यह इस योजना के लिए खर्च किया गया सबसे ज्यादा अमाउंट है। इससे पहले इस योजना के लिए कभी 3000 करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च नहीं किया गया था।
20 करोड़ आयुष्मान कार्ड जारी हो चुके हैं
पीएमजेएवाई के तहत 1,949 बीमारियों के लिए इलाज की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है। अब तक 4.2 करोड़ लोग इस योजना के तहत अपना इलाज करा चुके हैं। अब तक करीब 20 करोड़ आयुष्मान कार्ड जारी किए जा चुके हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि यूपी, बिहार, झारखंड और उत्तर-पूर्वी राज्यों में इस योजना पर फोकस बढ़ाने की जरूरत है। इन राज्यों में कार्ड्स डिस्ट्रिब्यूशन में तेजी लाने की भी जरूरत है। लोगों को इस योजना के तहत बेहतर हेल्थ सर्विसेज ऑफर करने के लिए प्राइवेट हॉस्पिटल की भी मदद ली जा रही है।
प्राइवेट अस्पतालों को शामिल करने से योजना की पहुंच बढ़ेगी
जानकारों का यह भी कहना है कि जब तक इस योजना में बड़ी संख्या में प्राइवेट अस्पतालों को शामिल नहीं किया जाता, ज्यादा लोगों को इसका लाभ पहुंचाना मुमकिन नहीं है। लेकिन, प्राइवेट अस्पताल इस योजना का हिस्सा बनने में दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं। उनकी दलील है कि इस योजना के तहत इलाज खर्च के लिए जो लिमिट तय की गई है, वह बहुत कम है। यह योजना समाज के कमजोर वर्ग के लोगों को स्वास्थ्य सुविधाएं देने के लिए शुरू की गई थी।
सरकार ने इस योजना के तहत 10 करोड़ परिवारों को लाने का टारगेट तय किया था। इस टारगेट को हासिल करने के लिए प्राइवेट हॉस्पिटल्स को इसके तहत लाना जरूरी है। अभी इस योजना से जुड़ने वाले ज्यादातर प्राइवेट अस्पताल आकार में छोटे हैं। इन अस्पतालों में गंभीर रोगों के इलाज की पर्याप्त सुविधा नहीं होती। एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर इस योजना को लागू करने में प्राइवेट अस्पतालों की मदद लेना चाहती है तो उसे इलाज पर खर्च की लिमिट बढ़ानी होगी।