बजट 2023 : सरकार इनकम टैक्स सिस्टम (Income Tax System) में रिफॉर्म्स के लिए कदम उठा सकती है। वह इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइलिंग के लिए फॉर्म्स की संख्या घटा सकती है। दरअसल, सरकार इनकम टैक्स रिटर्न फाइलिंग के प्रोसेस को आसान बनाना चाहती है। माना जा रहा है कि टैक्स कलेक्शंस 26 फीसदी बढ़ने से सरकार का कॉन्फिडेंस हाई है। इस साल डायरेक्ट और इनडायरेक्ट दोनों ही तरह के टैक्स कलेक्शन में उछाल देखने को मिला है। इससे इकोनॉमी में रिकवरी के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, सरकार ने टैक्स चोरी रोकने के लिए भी बड़े कदम उठाए हैं।
फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) 1 फरवरी, 2023 को यूनियन बजट (Union Budget 2023) पेश करेंगी। यह बजट ऐसे वक्त आ रहा है, जब अमेरिका, इंग्लैंड और यूरोप जैसी बड़ी इकोनॉमी में मुश्किल दिख रही है। इधर, इंडिया में इकोनॉमी की सेहत अपेक्षाकृत अच्छी है।
टैक्स के नियमों को आसान बनाने पर हो सकता है फोकस
सरकार टैक्स चोरी के खिलाफ सख्ती और बढ़ाना चाहती है। वह ई-कॉमर्स और ऑनलाइन सर्विस प्रोवाइडर्स के साथ ही ऑनलाइन गेमिंग के लिए टैक्स डिडक्शन के सख्त नियम लागू कर सकती है। अगले बजट में सरकार का फोकस डिजिटल इकोनॉमी को टैक्स के दायरे में लाने और क्रिप्टोकरेंसी से जुड़े टैक्स के ठोस नियम बनाने पर होने की उम्मीद है। अगले साल इंडिया G20 का शिखर सम्मेलन भी होने वाला है। माना जा रहा है कि इससे सरकार टैक्स के नियमों को पारदर्शी बनाने पर जोर दे सकती है। लॉन्ग-टर्म कैपिटल टैक्स के नियमों में भी काफी समय से बदलाव करने की मांग हो रही है।
कैपिटल गेंस टैक्स के नियमों की खामियां दूर होंगी
अभी अलग-अलग एसेट क्लास के लिए कैपिटल गेंस टैक्स के नियम एक जैसे नहीं हैं। टैक्स के रेट और होल्डिंग पीरियम में भी अंतर है। अभी शेयरों को एक साल से ज्यादा समय तक रखने पर 10 फीसदी की दर से लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस लागू होता है। अचल संपत्ति और अनलिस्टेड कंपनियों के शेयरों को 2 साल से ज्यादा समय के बाद बेचने पर 20 फीसदी की दर से लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस टैक्स लगता है। डेट इंस्ट्रूमेंट्स और ज्वेलरी को तीन साल से ज्यादा वक्त तक रखने पर 20 फीसदा कै कैपिटल गेंस टैक्स लगता है।
इनकम टैक्स की नई रीजीम को अट्रैक्टिव बनाने की होगी कोशिश
उम्मीद है कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण इनकम टैक्स की नई रीजीम में भी बदलाव कर सकती हैं। इसकी वजह यह है कि पेश होने के तीन साल बाद भी इसमें टैक्सपेयर्स दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं। सरकार की कोशिश इसे अट्रैक्टिव बनाकर इसमें टैक्सपेयर्स की दिलचस्पी बढ़ाने की होगी। बताया जाता है कि लंबी अवधि में सरकार इनकम टैक्स की पुरानी रीजीम को पूरी तरह से खत्म कर सकती है। इससे पहले नई रीजीम को लोकप्रिय बनाना जरूरी है।