Union Budget 2023: बिबेक देबरॉय ने इनकम टैक्स की नई रीजीम को बताया बेहतर, जानिए क्या कहा

Union Budget 2023: सरकार ने फाइनेंशियल ईयर 2019-20 में इनकम टैक्स की नई रीजीम पेश की थी। इसमें टैक्स रेट कम है, लेकिन टैक्सपेयर्स को डिडक्शंस और एग्जेम्प्शंस जैसे फायदे नहीं मिलते हैं। यही वजह है कि इसे अब तक टैक्सपेयर्स का अच्छा रिस्पॉन्स नहीं मिला है

अपडेटेड Dec 29, 2022 पर 7:57 PM
देबरॉय ने कहा है कि अगले फाइनेंशियल ईयर में इंडियन इकोनॉमी की ग्रोथ 6.5 फीसदी रह सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार अगले फाइनेंशियल ईयर में फिस्कल डेफिसिट का 5.8 फीसदी का टारगेट तय कर सकती है।

Union Budget 2023: सरकार की नई इनकम टैक्स रीजीम को टैक्सपेयर्स का अच्छा रिस्पॉन्स नहीं मिला है। लेकिन, इकोनॉमिस्ट्स इसे अच्छा बता रहे हैं। प्राइम मिनिस्टर इकोनॉमिक एडवायजरी कॉउंसिल (PMEAC) के चेयरमैन बिबेक देबरॉय ने कहा है कि सरकार को टैक्सपेयर्स को इनकम टैक्स की नई रीजीम को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए। सरकार ने इनकम टैक्स की नई रीजीम (Income Tax new regime) को फाइनेंशियल 2019-20 में पेश किया था। देबरॉय पहले भी इसकी वकालत कर चुके हैं। उन्होंने इसे इंडिया के डायरेक्ट टैक्सेज का फ्यूचर बताया था। देबरॉय ने कहा कि अगले फाइनेंशियल ईयर में पूंजीगत खर्च पर सरकार का फोकस बना रहेगा। फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) 1 फरवरी, 2023 को यूनियन बजट पेश करेंगी। यह बजट ऐसे वक्त आ रहा है जब सरकार पर इकोनॉमिक ग्रोथ तेज करने के उपायों के साथ ही फिस्कल कंसॉलिडेशन के उपाय करने का भी दबाव है।

फिस्कल डेफिसिट का 5.8% टारगेट तय कर सकती है सरकार

देबरॉय ने कहा है कि अगले फाइनेंशियल ईयर में इंडियन इकोनॉमी की ग्रोथ 6.5 फीसदी रह सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार अगले फाइनेंशियल ईयर में फिस्कल डेफिसिट का 5.8 फीसदी का टारगेट तय कर सकती है। उन्होंने कहा कि इनफ्लेशन में नरमी आनी शुरू हो गई है। नवंबर में रिटेल इनफ्लेशन 5.9 फीसदी पर आ गया। यह बीते 11 महीने में सबसे कम रिटेल इनफ्लेशन है। इनफ्लेशन को कंट्रोल में करने के लिए आरबीआई लगातार इंटरेस्ट रेट बढ़ा रहा है। इंटरेस्ट रेट बढ़ाने की शुरुआत उसने मई में की थी।


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इनकम टैक्स की नई रीजीम में टैक्सपेयर्स की दिलचस्पी नहीं

इननकम टैक्स की नई रीजीम में टैक्स रेट कम है। लेकिन, इसमें टैक्सपेयर्स को डिडक्शन और एग्जेम्प्शन का फायदा नहीं मिलता है। इसलिए ज्यादातर टैक्सपेयर्स इनकम टैक्स रिटर्न फाइलिंग के लिए अब भी पुरानी रीजीम का इस्तेमाल करना पसंद करते हैं। पुरानी टैक्स रीजीम में अगर टैक्सपेयर्स सभी तरह के डिडक्शंस और एग्जेम्प्शंस का इस्तेमाल करते हैं तो सालाना 9-10 लाख रुपये तक की इनकम पर उन्हें किसी तरह का टैक्स चुकाने की जरूरत नहीं पड़ती है। इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 80सी, 80सीसी1बी, 80डी और 24बी के तहत टैक्सपेयर्स को कई तरह के टैक्स बेनेफिट मिलते हैं।

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सरकार को इनकम बढ़ाने के करने होंगे उपाय

कई टैक्स एक्सपर्ट्स का यह भी कहना है कि अगर सरकार इनकम टैक्स की नई रीजीम को टैक्सपेयर्स के बीच लोकप्रिय बनाना चाहती है तो उसे पुराने टैक्स रीजीम के तहत मिलने वाले डिडक्शन और एग्जेम्प्शंस में कमी करनी होगी। सरकार को इंफ्रास्टक्चर सहित कई कई चीजों पर खर्च बढ़ाने की जरूरत है। इसके लिए उसे टैक्स कलेक्शंस बढ़ाना होगा। अभी टैक्स कलेक्शन जीडीपी का सिर्फ 15 फीसदी है। सरकार टैक्स कंप्लायंस बढ़ाने के लिए आईटीआर फाइलिंग सहित इनकम टैक्स नियमों को आसान बनाने की लगातर कोशिश कर रही है।

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