Budget 2023: RBI के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन (Raghuram Rajan) ने यूनियन बजट (Union Budget) से ठीक पहले सरकार के टैरिफ बढ़ाने का अनुमान जताया है। उन्होंने कहा है कि इससे इंडिया में कारोबार करना मुश्किल हो जाएगा। इससे चीन का विकल्प बनने की इंडिया की कोशिशों को भी झटका लगेगा। एक मीडिया हाउस से बातचीत में उन्होंने कहा कि सरकार को इस बजट में अपने रिफॉर्म्स प्लान के बारे में बताना चाहिए। ये रिफॉर्म्स संवेदनशील और टिकाऊ होने चाहिए। इनसे इकोनॉमिक ग्रोथ के प्रोसेस को सपोर्ट मिलेगा। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) 1 फरवरी, 2023 को यूनियन बजट पेश करेंगी। यह बजट ऐसे वक्त आ रहा है, जब अमेरिका, इंग्लैंड और यूरोप जैसी बड़ी इकोनॉमी पर मंदी का खतरा मंडरा रहा है। इधर, इंडिया में इकोनॉमी की हालत अपेक्षाकृत अच्छी है।
विदेशी कंपनियां तलाश रहीं चीन का विकल्प
कोरोना की महामारी के बाद दुनिया की कई बड़ी कंपनियां मैन्युफैक्चरिंग के लिए चीन का विकल्प तलाश रही हैं। इंडिया इस मौके का फायदा उठा सकता है। उम्मीद है कि इसे ध्यान में रखन यूनियन बजट में कुछ अहम ऐलान किए जा सकते हैं। इस बारे में राजन ने कहा कि इंडिया को टैरिफ बढ़ाना बंद करना चाहिए, क्योंकि इससे उन कंपनियों पर खराब असर पड़ेगा जो चीन के विकल्प के रूप में इंडिया की तरफ देख रही हैं।
चीन का एकमात्र विकल्प नहीं है इंडिया
RBI के पूर्व गवर्नर ने यह भी कहा कि यह सच है कि इंडिया ऐसा देश है, जिसकी तरफ कई कपनियां देख रही हैं। लेकिन, यह पहला ऑप्शन नहीं है क्योंकि कंपनियां वियतनाम जैसे देशों को रुख कर सकती हैं, जहां पॉलिसी के मामले में ज्यादा स्थिरता है। उन्होंने कहा, "सरकार को अपनी पॉलिसी में स्थिरता बनाए रखने की जरूरत है। साथ ही पॉलिसी प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) के अनुकूल होनी चाहिए। हमने देखा है कि कुछ पॉलिसीज एमेजॉन और वॉलमार्ट जैसी कंपनियों के प्रतिकूल रही हैं। इंडिया को इसके लिए रास्ते बनाने पड़ेंगे।" उन्होंने कहा कि अमेरिकी कंपनियों के लिए मैक्सिको दूसरा ऑप्शन है। इससे कंपनियों को NAFTA के तहत बने रहने का भी अतिरिक्त फायदा मिलेगा।
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इंडियन इकोनॉमी की सेहत भले ही दूसरे देशों से अच्छी है, लेकिन यहां बेरोजगारी बढ़ रही है। अक्टूबर में बेरोजगारी दर 7.7 फीसदी थी, जो नवंबर में बढ़कर 8 फीसदी हो गई। इसकी सबसे बड़ी वजह शहरी क्षेत्रों में बेरोजगारी का बढ़ना है। सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (CMIE) के डेटा से यह जानकारी मिली है। सरकार को बेरोजगारी में कमी लाने के लिए ठोस उपाय करने की जरूरत है।