Budget 2023: यूनियन बजट 2023 ऐसे वक्त आएगा, जब ग्लोबल इकोनॉमी गंभीर मुश्किल में दिख रही है। इधर, इंडियन इकोनॉमी को उम्मीद की किरण के रूप में देखा जा रहा है। पिछले हफ्ते IMF इंडिया की इकोनॉमिक ग्रोथ करीब 7 फीसदी रहने की उम्मीद जताई है। सरकार इकोनॉमिक ग्रोथ बढ़ाने वाले उपायों पर फोकस कर रही है। दरअसल, पिछले दो बजट कोरोना की महामारी के बीच पेश किए गए। इसलिए सरकार की प्राथमिकता बजट में ऐसे उपाय करने पर होगी, जो कोरोना से हुए नुकसान की भरपाई कर इकोनॉमी को तेज ग्रोथ के रास्ते पर ले जाएंगे। फाइनेंस मिनिस्टर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) 1 फरवरी, 2023 को यूनियन बजट पेश करेंगी। इस बजट से इंडस्ट्री के अलग-अलग सेक्टर को बहुत उम्मीदें हैं।
इज ऑफ डूइंग बिजनेस पर फोकस जरूरी
यूए-इंडिया स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप फोरम (USISPF) के टैक्स फोरम ने सरकार से स्थिर टैक्स इनवायरमेंट की मांग की है। इससे इनवेस्टमेंट सेंटीमेंट बढ़ाने में मदद मिलेगी। एक्सपर्ट्स का भी मानना है कि अभी जैसी पॉलिसी पर फोकस रखने की जरूरत है, जो इकोनॉमिक रिकवरी को सपोर्ट कर सकती हैं। सरकार को इज ऑफ डूइंग बिजनेस पर भी फोकस करने की जरूरत है। साथ ही टैक्स रेट्स और टैरिफ को भी तर्कसंगत बनाने की जरूरत है।
देशी और विदेशी कंपनियों के लिए बने एक जैसे नियम
टैक्स फोरम का कहना है कि सरकार को टैक्स के मामले में देशी और विदेशी कंपनियों के लिए एक जैसे नियम बनाने की जरूरत है। इससे खासकर बैंकिंग सेक्टर में बहुत बदलाव देखने को मिलेगा। इंडिया में विदेशी बैंकों की ब्रांच को ज्यादा टैक्स चुकाना पड़ता है। सरकार को कैपिटल गेंस टैक्स के नियमों में भी बदलाव करने की जरूरत है। इसकी मांग लंबे समय से हो रही है। अगर सरकार इस नियम में बदलाव करती है तो इससे इनवेस्टमेंट को बढ़ावा मिलेगा।
TDS और TCS को तर्कसगंत बनाने से होगा फायदा
टैक्स फोरम ने विदहोल्डिंग टैक्स रीजीम को आसान बनाने की मांग की है। एक्सपर्ट्स का भी कहना है कि टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल बढ़ाकर TDS और TCS को तर्कसंगत बनाया जा सकता है। ई-कॉमर्स कंपनियों को विदहोल्डिंग टैक्स कंप्लायंस में कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। इन दिक्कतों को दूर करने से ई-कॉमर्स सेक्टर की ग्रोथ बढ़ाने में मदद मिलेगी।