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Budget 2023: पूंजीगत खर्च में वृद्धि, फिस्कल डेफिसिट में कमी चाहता है मार्केट

Union budget 2023: मार्केट का मानना है कि मौद्रिक नीति में सख्ती बढ़ने के बीच फिस्कल पॉलिसी बड़ी मददगार साबित होगी। कोरोना की महामारी का असर अब करीब खत्म हो जाने के बाद सरकार को फिर से इकोनॉमिक ग्रोथ 6-8 फीसदी तक लाने की कोशिश करनी चाहिए। प्राइवेट कैपेक्स साइकिल भी बढ़नी चाहिए

Curated By: Rakesh Ranjanअपडेटेड Jan 06, 2023 पर 5:33 PM
Budget 2023: पूंजीगत खर्च में वृद्धि, फिस्कल डेफिसिट में कमी चाहता है मार्केट
मार्केट से जुड़े लोगों का मानना है कि सरकार को अगले वित्त वर्ष के लिए पूंजीगत खर्च के टारगेट को बढ़ाकर 10 लाख करोड़ रुपये करना चाहिए।

Budget 2023: यूनियन बजट (Union Budget 2023) आने में एक महीना से कम समय बचा है। इस साल इंडियन शेयर बाजार का प्रदर्शन सबसे अच्छा रहा है। बाजार का मानना है कि ग्लोबल इकोनॉमी में मुश्किल के बावजूद इंडियन इकोनॉमी का प्रदर्शन आगे अच्छा रहेगा। इसलिए मार्केट को फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) के अगले बजट से काफी उम्मीदें हैं। उसका मानना है कि इससे इस साल शेयर बाजार की दिशा तय होगी। सरकार का खर्च बढ़ाना प्राइवेट सेक्टर के लिए भी काफी मायने रखता है। इससे इकोनॉमी में डिमांड बढ़ेगी। स्टॉक मार्केट से जुड़े लोगों को अगले बजट से चार बड़ी उम्मीदें हैं। वे चाहते हैं कि सरकार इंफ्रास्ट्रकचर जैसे सेक्टर पर अपना खर्च बढ़ाए। सरकार रूरल डिमांड और कंजम्प्शन बढ़ाने के लिए कदम उठाए। फिस्कल डेफिसिट को कम करने के उपाय करे। अंतिम यह कि सरकार टैक्स सिस्टम में किसी तरह का बदलाव नहीं करे।

सरकार को पूंजीगत खर्च में वृद्धि जारी रखनी होगी

इंडियन मार्केट्स के लिए यह फाइनेंशियल ईयर (2022-23) उतार-चढ़ाव वाला रहा है। लेकिन दुनिया के दूसरे बाजारों से तुलना करने पर इसका प्रदर्शन बहुत अच्छा रहा है। इस फाइनेंशियल ईयर में Sensex और Nifty 50 ने करीब 3 फीसदी रिटर्न दिया है। इसके मुकाबले अमेरिकी शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांक S&P 21 फीसदी गिर चुका है। हांगकांग से लेकर ब्राजील जैसे दूसरे उभरते बाजारों में भी बड़ी गिरावट आई है।

दुनियाभर में केंद्रीय बैंकों के इंटरेस्ट रेट्स बढ़ाने, हाई इनफ्लेशन और इकोनॉमिक ग्रोथ सुस्त पड़ने की आशंकाओं ने इनवेस्टर्स की फिक्र बढ़ाई है। ग्लोबल इकोनॉमी पर मंदी के मंडराते खतरे ने निराशा बढ़ाई है। लेकिन, इंडिया उम्मीद की एक किरण के रूप में नजर आया है। इसमें इकोनॉमिक ग्रोथ का सबसे बड़ा हाथ है।

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