बजट 2023: ढाई साल पहले शुरू हुई कोरोना की महामारी के बाद फिर से इंडस्ट्री से जुड़ी गतिविधियां सामान्य स्तर पर आ गई हैं। इनमें टेक्नोलॉजी सेक्टर भी शामिल है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, बिग डेटा का इस्तेमाल बढ़ रहा है। 5जी टेलीकॉम सेवाओं की शुरुआत हो चुकी हैं। धीरे-धीरे यह देश के सभी हिस्सों में उपलब्ध हो जाएगी। टेक्नोलॉजी सेक्टर को सरकार की मदद की जरूरत है। आईटी कंपनियों का प्रतिनिधित्व करने वाली संस्था नैस्कॉम (NASSCOM) ने बजट से अपनी उम्मीदों के बारे में वित्त मंत्री निर्मला सीतारण (Nirmala Sitharaman) को बता दिया है। उसका मानना है कि वित्त मंत्री 1 फरवरी, 2023 को पेश होने वाले बजट (Union Budget 2023) में उसकी डिमांड्स पूरी कर सकती है। इससे आईटी सेक्टर को ऐसे वक्त मजबूती मिलेगी, जब अमेरिका, यूरोप और इंग्लैंड जैसी बड़ी इकोनॉमी पर मंदी का खतरा मंडरा रहा है। इंडियन आईटी कंपनियं की रेवेन्यू में अमेरिका और यूरोप की बड़ी हिस्सेदारी है।
सेफ हार्बर पॉलिसी में बदलाव की जरूरत
नैस्कॉम ने कहा है कि अभी सेफ हार्बर मार्जिन सिर्फ उन कंपनियों के लिए नोटिफाई किया गया है, जिनका टर्नओवर 200 करोड़ रुपये तक है। इस वजह से सिर्फ कुछ कंपनियां इसका इस्तेमाल कर पाती हैं। उसने सरकार से इस पर पुनर्विचार करने का अनुरोध किया है। उसने कहा है कि सेफ हार्बर पॉलिसी के दायरे में उन कंपनियों को लाने की जरूरत है, जिनका टर्नओवर 1000 रुपये तक है।
आरएंडडी पर निवेश के लिए ज्यादा आवंटन जरूरी
प्रमुख उद्योग चैंबर FICCI ने वित्त मंत्री को रिसर्च एंड डेवलपमेंट पर निवेश बढ़ाने के लिए उपाय करने की सलाह दी है। उसने कहा है कि नए आइडियाज और टेक्नोलॉजीज को बढ़ावा देने के लिए सरकार को 2-3 नेशनल आरएंडडी आइडियाज इनक्यूबेटर शुरू करने की जरूरत है। इसे एजुकेशन इंस्टीट्यूशंस और इंडस्ट्रीज मिलकर शुरू कर सकते हैं। साथ में सेंटर फॉर एक्सपर्टाइज शुरू करने की भी जरूरत है। सरकार बायोलॉजी, केमिस्ट्री, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, इंजीनियरिंग और डेटा एनालिटिक्स के एक्सपर्ट्स की मदद से टेक्नोलॉजी के बेहतर इस्तेमाल के लिए कदम उठा सकती है।
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ग्रीन एनर्जी का इस्तेमाल बढ़ाने के उपाय किए जाए
टेक्नोलॉजी सेक्टर के लिए 2021-22 अच्छा रहा। इस सेक्टर को सरकार की तरफ से प्रोत्साहन की जरूरत है। जलवायु परिवर्तन पर भी सरकार को फोकस बढ़ाने की जरूरत है। दुनियाभर में ग्रीन एनर्जी का इस्तेमाल बढ़ाने की कोशिश हो रही है। इंडिया में भी निजी और सरकार स्तर पर इस पर फोकस बढ़ा है। रिलायंस इंडस्ट्रीज और अडानी ग्रुप हाइड्रोजन एनर्जी पर बड़ा निवेश कर रहे हैं। कई मध्यम और छोटी कंपनियां भी ग्रीन एनर्जी की टेक्नोलॉजी तैयार करने पर फोकस कर रही हैं। सरकार को ऐसी कंपनियों को प्रोत्साहन देने की जरूरत है।