Budget 2023: इन उपायों से स्टार्टअप सेक्टर पकड़ सकता है तेज रफ्तार

Budget 2023: स्टार्टअप शुरू करने के लिए अभी उद्यमी को कई दफ्तरों का चक्कर लगाना पड़ता है। सरकार सभी तरह के एप्रूवल और क्लियरेंस के लिए सिंगल विंडो सिस्टम शुरू कर सकती है। इससे उद्यमियों के पैसे, समय और मेहनत बचेगी

अपडेटेड Jan 03, 2023 पर 4:47 PM
हर राज्य और हर इंडस्ट्री में रोजगार के नए मौके उपलब्ध कराने में स्टार्टअप्स सबसे आगे हैं।

कारोबार के अनुकूल माहौल वाले देश के रूप में इंडिया की पहचान लगातार बढ़ रही है। उद्यम शुरू करने को लेकर उत्साह हमारी सबसे बड़ी ताकत है। डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन के लिहाज से यूनियन बजट (Union Budget) 2022-23 को हमेशा याद रखा जाएगा। इसमें इंडिया के डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन के लिए बड़े उपाय किए गए थे। स्टार्टअप्स रोजगार के मौके उपलब्ध कराने में बड़ी भूमिका निभाते हैं। ये बाजार में कई तरह के नए आविष्कार लेकर भी सामने आते हैं। हर राज्य और हर इंडस्ट्री में रोजगार के नए मौके उपलब्ध कराने में स्टार्टअप्स सबसे आगे हैं। रोबोटिक्स, डीपटेक, क्लीन एनर्जी, वेब3 और डिजिटल हेल्थ से जुड़े उद्यमी नई इंडस्ट्रीज शुरू करेंगे। वे उन समस्याओं का भी समाधान उपलब्ध कराएंगे, जिसका सामना आज हम कर रहे हैं। जहां तक उद्यमशीलता की बात है तो सरकार पहले से दुनिया में एक आर्थिक ताकत के रूप में इंडिया को स्थापित करने के लिए कई तरह के उपाय कर रही है। इसके बावजूद ऐसी कई सिफारिशें हैं, जिन्हें लागू करने पर इंडिया में स्टार्टअप्स की रफ्तार बढ़ सकती है।

1. एंजेल इनवेस्टर पूल

इंडियन स्टार्टअप्स के लिए सीड स्टेज पर एंजेल इनवेस्टर पूल बढ़ाया जा सकता है। जिस साल में इनवेस्टमेंट किया जाता है, उस साल एंजेल इनवेस्टर की इनकम टैक्स लायबिलिटी के साथ इक्विटी शेयरों की कॉस्ट के 30 फीसदी तक टैक्स इनसेंटिव रिलीफ दी जा सकती है। इस रिलीफ का दावा शेयरों में 1 करोड़ रुपये तक के निवेश पर किया जा सकता है। अधिकतम पॉसिबल टैक्स डिडक्शन 30 रुपये हो सकता है।

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2. एंपलॉयी स्टॉक ऑप्शन प्लांस (ESOPs)

इंडिया में लंबे समय से ईसॉप्स की अनदेखी की जाती रही है। लेकिन, ऐसी कहानियां बढ़ रही हैं, जिनमें अपना स्टार्टअप शुरू करने से पहले लोगों ने ईसॉप्स के जरिए बड़ा फंड जुटाया था। इंडस्ट्री लंबे समय से वेस्टिंग के समय की जगह प्वॉइंट ऑफ सेल पर ईसॉप्स पर टैक्स लगाने की मांग कर रही है।

3. सभी रजिस्ट्रेशन के लिए सिंगल विंडो

कंपनी इनकॉर्पोरेशन, शॉप एश्टिब्लिसमेंट, जीएसटी रजिस्ट्रेशन, एमएसएमई सर्टिफिकेट सहित कई तरह के रजिस्ट्रेशन की जरूरत एक स्टार्टअप को पड़ती है। इसके लिए एक सिंगल विंडो सिस्टम शुरू किया जा सकता है। इससे स्टार्टअप्स का समय, पैसा और मेहनत बचेगी।

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4. जीएसटी क्रेडिट का कौलेटरल के रूप में इस्तेमाल

पीएसयू बैंकों को इकट्ठा हुए जीएसटी क्रेडिट को कोलैटरल के रूप इस्तेमाल करने की इजाजत देने की चर्चा काफी समय से चल रही है। इसे लागू करने का इससे अच्छा समय नहीं हो सकता। इससे न सिर्फ एसएमई और स्टार्टअप्स को मिदद मिलेगी बल्कि इससे बैंक भी पिछले दो बजट से इस्तेमाल नहीं की गई लोन लिमिट का फायदा उठा सकेंगे।

5. सेट-ऑफ ऑप्शन के बगैर 30 फीसदी टैक्स

सरकार ने पिछले बजट में दूसरे वर्चुअल एसेट्स पर हुए लॉस को बगैर सेट-ऑफ ऑप्शन 30 फीसदी टैक्स लगाने का प्रस्ताव पेश किया था। इसे बदलकर सेटऑफ की इजाजत देनी चाहिए, क्योंकि इससे क्रिप्टो ट्रेडिंग टर्नओवर का वॉल्यूम बढ़ेगा। टीडीएस को 1 फीसदी से घटाकर 0.25 फीसदी किया जा सकता है।

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