संदीप सभरवाल
संदीप सभरवाल
Budget 2023: फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) यूनियन बजट (Union Budget 2023) पेश करने से पहले इंडस्ट्री के कई सेक्टर के साथ बातचीत कर रही हैं। रोजगार के मौके पैदा करने, इकोनॉमिक ग्रोथ तेज करने, टैक्स चुकाने वाले लोगों की संख्या बढ़ाने, इनकम टैक्स स्लैब की कमियां दूर करने पर उनका फोकस है। वह GST की दरों में बदलाव कर कंजम्प्शन बढ़ाना चाहती हैं। इकोनॉमिक ग्रोथ की रफ्तार बढ़ाने के लिए यह जरूरी है। रेटिंग फर्म S&P ने हाल में ग्लोबल इकोनॉमी की ग्रोथ के अनुमान को 3.1 फीसदी से घटाकर 2.4 कर दिया है। उसने इस फाइनेंशियल ईयर में इंडिया की ग्रोथ के अनुमान को घटाकर 6.5 फीसदी कर दिया है। सभी सेक्टर से जुड़े रेगुलेटरी सिस्टम को भी इंडिया की ग्रोथ की रफ्तार बनाए रखने पर फोकस करना होगा। इस लिहाज से एग्रीकल्चर वैल्यू चेन को मजबूत बनाने के लिए पॉलिसी में जरूरी बदलाव करने की जरूरत है। फाइनेंस मिनिस्टर निम्निलिखित कदम उठा सकती हैं:
1. एग्री-टेक में पूंजीगत खर्च पर टैक्स में राहत
एग्री-बिजनेस में टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल बढ़ा है। इसमें क्लाउड, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), बिग डेटा, ब्लॉकचेन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग (ML) का बड़ा हाथ है। एग्री-बिजनेस से जुड़ी कंपनियां टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल से रियल टाइम डेटा कलेक्ट कर रही हैं। उनका एनालिसिस कर रही हैं, उसने आधार पर अनुमान लगा रही हैं और कृषि से संबंधित डेटा की रियल-टाइम मॉनटरिंग कर रही हैं।
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इससे एग्रीकल्चर के क्षेत्र में बड़ा बदलाव आया है। छोटे किसानों के लिए कम कीमत पर कृषि सेवाओं का फायदा उठाने के मौके बने हैं। ऐसे में एग्रीकल्चर वैल्यू-चेन को टैक्स में राहत देना जरूरी है। इससे टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल से बिजनेस ऑपरेशंस में सुधार लाने में मदद मिलेगी। इंडस्ट्री का मानना है कि यूनियन बजट 2023 में टैक्स में राहत के ऐलान से इनवेस्टर्स नई टैक्नोलॉजी में निवेश करने के लिए प्रोत्साहित होंगे।
2. वेयरहाउसिंग को जीएसटी के दायरे में बाहर किया जाए
अभी वेयरहाउसिंग बिजनेस जीएसटी के दायरे में आता है। कृषि से जुड़ी सेवाएं देने में वेयरहाउसिंग का बड़ा रोल है। यह बिजनेस के लिए एक इनपुट कॉस्ट है। इसे ध्यान में रख सरकार को वेयरहाउसिंग के किराए को जीएसटी के दायरे से बाहर करना चाहिए। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण इस बारे में बजट में ऐलान कर सकती हैं।
3. क्रेडिट पर सब्सिडी जरूरी
सरकार को NABARD को पूंजी उपलब्ध कराती है। यह सब्सिडी पर दी जाती है। नाबार्ड इस पूंजी का इस्तेमाल कृषि क्षेत्र को कर्ज देने के लिए करता है। इसी तरह छोटे किसानों को कर्ज उपलब्ध कराने में NBFC का भी बड़ा रोल होता है। ऐसे एनबीएफसी को नाबार्ड की तरह कैपिटल पर सब्सिडी मिलनी चाहिए। सरकार कृषि कार्यों के लिए कर्ज मुहैया कराने वाली एनबीएफसी को टैक्स बेनेफिट का भी ऐलान कर सकती है। इससे कृषि क्षेत्र में उत्पादकता बढ़ेगी। साथ ही सरकार को भी किसानों की आय दोगुनी करने के टारगेट को हासिल करने में मदद मिलेगी।
(लेखक SLCM Group के सोहन लाल कमोडिटी मैनेजमेंट के सीईओ हैं।)
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