Budget 2023 : माइक्रोफाइनेंस सेक्टर को इस यूनियन बजट से टैक्स नियमों में कुछ छूट मिलने की उम्मीद है। इससे इंडस्ट्री के लिए कर्ज की लागत कम करने में मदद मिलेगी। इसके साथ ही सेक्टर को अपने ऑपरेशंस से जुड़े नियमों के सरल होने का भी भरोसा है। Microfinance institutions (MFIs) को कमजोर वर्ग से आने वाले अपने क्लाइंट्स को कर्ज देने के लिए बैंकों से पूंजी उधार लेनी होती है। ये लेंडर आम तौर पर माइक्रो, स्मॉल और मीडियम एंटरप्राइजेस (MSMEs) और खुदरा ग्राहकों सहित कम आय वाले समूह को सेवाएं देते हैं।
MFIs को हाल के महीनों में उधारी की लागत में बढ़ोतरी का सामना करना पड़ा है। फरवरी 2022 में एमएफआई की उधारी की लागत 200 बेसिस प्वाइंट्स बढ़कर 400 बेसिस प्वाइंट्स हो गई थी। आम तौर पर बड़े एमएफआई 18-22 फीसदी की रेंज में इंटरेस्ट वसूलते हैं, लेकिन ब्याज दरें बढ़ने के बाद इसमें खासा बदलाव आया है।
क्रेडिट ब्यूरो सीआरआईएफ हाई मार्क (CRIF High Mark) ने जून 2022 में निर्धारित समयसीमा के 180 दिन बाद तक 24,500 करोड़ रुपये के लोन का भुगतान नहीं होने की जानकारी दी थी। एमएफआई की इंडस्ट्री बॉडी Sa-Dhan ने भी उधारी की लागत से जुड़ा इश्यू उठाया था और एनपीए के आंकड़े सामने रखे थे। इंडस्ट्री बॉडी ने एक रिपोर्ट में कहा था, “माइक्रोफाइनेंस के कुल 2.76 लाख करोड़ रुपये के लोन में से लगभग 12 फीसदी जून 2022 तक एनपीए बने हुए थे। हालांकि, कुल रिपेमेंट कलेक्शन में सुधार दिख रहा है।”
कुछ कंपनियों के लिए फंड लेना है मुश्किल
Sa-Dhan के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर Jiji Mammen ने कहा, “भले ही सेक्टर के लिए फंड के फ्लो में सुधार हुआ है, लेकिन कुछ माइक्रोफाइनेंस कंपनियों के लिए बैंकों से फंड लेना मुश्किल हो गया है। हम इस अंतर को दूर करने पर काम कर रहे हैं।”
सा-धन के चेयरपर्स एचपी सिंह ने कहा, “बजट में अगर क्रेडिट गारंटी स्कीम्स और नाबार्ड के तहत एमएफआई के लिए फंड की लिमिट बढ़ेगी तो हमें खुशी होगी। इससे एमएफआई सेक्टर के लिए क्रेडिट लेंडिंग सुविधाओं को मजबूती मिलेगी।”
क्रेडिट गारंटी फंड का हो ऐलान
डिजिटल लेंडर इंडिफाई टेक्नोलॉजिज के सीईओ आलोक मित्तल ने कहा, “माइक्रो और स्मॉल एंटरप्राइजेस के लिए क्रेडिट गारंटी फंड ट्रस्ट (CGTMSE) और माइक्रो यूनिट्स के लिए क्रेडिट गारंटी फंड (CGFMU) जैसे प्रोग्राम समावेशन के लिए अनुकूल होंगे। इससे लाखों माइक्रो और स्मॉल बिजनेसेस की ग्रोथ फाइनेंस तक पहुंच सुनिश्चित होगी।”
सिंह ने कहा कि सिडबी का सरकारी फंड्स के आवंटन के लिए एक बॉडी के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे एनबीएफसी की बैंकों पर निर्भरता खासी घट जाएगी।