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Budget 2023: बजट में कर में छूट और उधारी लागत में कमी पर हो जोर, माइक्रोफाइनेंस सेक्टर ने की वकालत

Budget 2023 : माइक्रोफाइनेंस इंडस्ट्री को बजट से कर्ज की लागत कम करने की दिशा में कुछ ऐलान होने और ऑपरेशंस से जुड़े नियम आसान होने की उम्मीद है। MFIs को हाल के महीनों में उधारी की लागत में बढ़ोतरी का सामना करना पड़ा है। फरवरी 2022 में एमएफआई की उधारी की लागत 200 बेसिस प्वाइंट्स बढ़कर 400 बेसिस प्वाइंट्स हो गई थी

MoneyControl Newsअपडेटेड Jan 18, 2023 पर 10:59 AM
Budget 2023: बजट में कर में छूट और उधारी लागत में कमी पर हो जोर, माइक्रोफाइनेंस सेक्टर ने की वकालत
Budget 2023 : Microfinance institutions आम तौर पर माइक्रो, स्मॉल और मीडियम एंटरप्राइजेस (MSMEs) और खुदरा ग्राहकों सहित कम आय वाले समूह को सेवाएं देते हैं

Budget 2023 : माइक्रोफाइनेंस सेक्टर को इस यूनियन बजट से टैक्स नियमों में कुछ छूट मिलने की उम्मीद है। इससे इंडस्ट्री के लिए कर्ज की लागत कम करने में मदद मिलेगी। इसके साथ ही सेक्टर को अपने ऑपरेशंस से जुड़े नियमों के सरल होने का भी भरोसा है। Microfinance institutions (MFIs) को कमजोर वर्ग से आने वाले अपने क्लाइंट्स को कर्ज देने के लिए बैंकों से पूंजी उधार लेनी होती है। ये लेंडर आम तौर पर माइक्रो, स्मॉल और मीडियम एंटरप्राइजेस (MSMEs) और खुदरा ग्राहकों सहित कम आय वाले समूह को सेवाएं देते हैं।

बढ़ गई है कर्ज की लागत

MFIs को हाल के महीनों में उधारी की लागत में बढ़ोतरी का सामना करना पड़ा है। फरवरी 2022 में एमएफआई की उधारी की लागत 200 बेसिस प्वाइंट्स बढ़कर 400 बेसिस प्वाइंट्स हो गई थी। आम तौर पर बड़े एमएफआई 18-22 फीसदी की रेंज में इंटरेस्ट वसूलते हैं, लेकिन ब्याज दरें बढ़ने के बाद इसमें खासा बदलाव आया है।

तेजी से बढ़े हैं एनपीए

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