Budget 2023: तेजी से रिकवरी के लिए ट्रैवल सेक्टर चाहता है इंडस्ट्री का दर्जा, टैक्स बेनिफिट्स

Budget 2023: ट्रैवल से जुड़ी गतिविधियां पिछले एक साल में बढ़ने से टूरिज्म इंडस्ट्री ने थोड़ी राहत की सांस ली है। हालांकि अभी भी यह सेक्टर कोरोना महामारी के पहले वाले स्तर पर नहीं पहुंच सका है और इसके लिए आगामी यूनियन बजट 2023-24 से बड़ी आस लगाए हुए बैठा है

अपडेटेड Jan 13, 2023 पर 9:21 PM
क्रिसिल के मुताबिक देश की ट्रैवल इंडस्ट्री वित्त वर्ष 2024 में ही पूरी तरह से उबर पाएगी

Budget 2023: ट्रैवल इंडस्ट्री के लिए साल 2020 और 2021 काफी मुश्किल भरे रहे थे। यह कोरोना महामारी से सबसे अधिक प्रभावित होने वाली इंडस्ट्री में से एक था। हालांकि महामारी का असर खत्म होने के बाद लोगों ने फिर से घूमना-फिरना शुरू कर दिया है, जिससे इंडस्ट्री ने थोड़ी राहत की सांस ली है। हालांकि अभी भी यह सेक्टर कोरोना महामारी के पहले वाले स्तर पर नहीं पहुंच सका है और इसके लिए आगामी यूनियन बजट 2023-24 (Union Budget 2023-24) से बड़ी आस लगाए हुए बैठा है।

महामारी की मार

कोरोना महामारी के प्रकोप के चलते पर्यटन से जुड़ी गतिविधियां एकदम ठप हो गई थी। इसके चलते इंडस्ट्री में बड़े पैमाने पर छंटनी और रेवेन्यू का नुकसान देखने को मिला।

साल 2020 की शुरुआत से अबतक देश में कोरोना की तीन लहरें आ चुकी हैं। इस दौरान ट्रैवल इंडस्ट्री से जुड़े करीब 2.15 करोड़ लोगों ने रोजगार खो दिए। केंद्रीय पर्यटन मंत्री जी किशन रेड्डी ने पिछले साल मार्च में लोकसभा में यह जानकारी दी थी।


पर्यटन मंत्रालय की एक स्टडी के मुताबिक, पहली लहर के दौरान 1.45 करोड़ लोगों ने, दूसरी लहर के दौरान 52 लाख लोगों ने और तीसरी लहर में करीब 18 लाख लोगों ने अपनी नौकरियां खोईं।

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ब्राइटसन ट्रैवल प्राइवेट लिमिटेड के हेड संदीप अरोड़ा ने बताया, "हमें एयरलाइन और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर्स में नौकरी के लिए अनुभवी लोग नहीं मिल रहे क्योंकि कोरोना महामारी के दौरान जिन लोगों की नौकरियां गईं, उनमें से कई ने दूसरे वैकल्पिक करियर अपना लिए।"

पर्यटन मंत्री ने भी कहा था कि कोरोना महामारी से भारत सहति पूरी दुनिया में ट्रैवल इंडस्ट्री बुरी तरह प्रभावित हुई, जिससे टूरिज्म इकोनॉमी में काफी गिरावट आई है। उन्होंने यह भी बताया था कि पहली लहर के दौरान विभिन्न देशों से आने वाले पर्यटकों की संख्या में 93%, दूसरी लहर में 79% और तीसरी लहर में 64% कमी आई थी।

क्रिसिल रेटिंग की पिछले साल अप्रैल में आई एक रिपोर्ट में कहा गया था कि देश का ट्रैवल और टूरिज्म इंडस्ट्री वित्त वर्ष 2024 में ही जाकर पूरी तरह से उबर पाएगा और 2023 में यह कोरोना-पूर्व स्तर के 70 फीसदी पर होगा।

केंद्रीय बजट पर निगाहें

अरोड़ा ने कहा, "इंडस्ट्री धीरे-धीरे महामारी के असर से उबर रही है। हालांकि फ्लाइट और होटलों पर जीएसटी की ऊंची दरें और पिछले बजट में इंडस्ट्री को मिले सीमित सपोर्ट को लेकर यह चिंतिंत है।" उन्होंने कहा कि इंटरनेशनल टूरिज्म दशकों पीछे चला गया है और अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों के आने की संख्या अभी भी साल 2019 के स्तर से कम है।

Southern Travels के मैनेजिंग डायरेक्टर अलापति कृष्ण मोहन ने कहा, "हमारी सिफारिश है कि भारत से बाहर जाने वाले यात्री जिन सामानों पर बैगेज के तौर पर IGST (इंटीग्रेटेड गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स) का भुगतान करते हैं, उसके रिफंड की सरकार को एक स्पष्ट सिस्टम बनाना चाहिए। इंडस्ट्री अभी रिकवरी मोड में है, ऐसे में यह छूट काफी अहम हो सकती है।"

EaseMyTrip के सीईओ और को-फाउंडर निशांत पिट्टी ने कहा कि इंडस्ट्री के रिकवरी पर अधिक ध्यान देने की जरूरत है। इसे टूरिस्टम वीजा पर ई-वीजा शुल्क को माफ कर और भारतीय नागरिकों और कंपनियों के लिए घरेलू इनकम टैक्स ट्रैवल क्रेडिट सिस्टम को लागू करके किया जा सकता है।

इसके अलावा ट्रैवल और टूरिज्म सेक्टर खुद को अधिक व्यवस्थित बनाने के लिए इंडस्ट्री का दर्जा दिए जाने की मांग कर रही है। अरोड़ा ने कहा कि विभिन्न पर्यटन स्थलों पर इंफ्रास्ट्रक्चर को सुधारने के लिए ट्रैवल सेक्टर को सरकारी समर्थन और निवेश की जरूरत है।

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