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Budget 2023: निर्मला सीतारमण से यूनियन बजट में क्या-क्या चाहता है IMF?

Budget 2023: IMF का कहना है कि सरकार को अपने खर्चों में कमी लाने और इनकम बढ़ाने की जरूरत है। इसके लिए उसने कुछ तरीके भी बताए हैं। लेकिन, उम्मीद है कि सरकार आईएमएफ की सलाह नहीं मानेगी, क्योंकि 2024 के लोकसभा चुनावों से पहले खर्च घटाने के उपायों के गलत नतीजें आ सकते हैं

Curated By: Rakesh Ranjanअपडेटेड Jan 04, 2023 पर 3:28 PM
Budget 2023: निर्मला सीतारमण से यूनियन बजट में क्या-क्या चाहता है IMF?
आईएमएफ ने कहा है कि इस साल सरकार ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोगों को जो आर्थिक मदद दी है, वह स्वागतयोग्य है। उसने फर्टिलाइजर पर सब्सिडी बढ़ाने के कदम को भी अच्छा बताया है। उसने कहा है कि इससे एग्रीकल्चर प्रोडक्शन और इनकम बढ़ेगी।

Budget 2023: इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (IMF) ने सरकार (भारत) के साथ हाल में आर्थिक और वित्तीय स्थिति और उसकी पॉलिसी पर हुई चर्चा के बारे में एक रिपोर्ट जारी की है। इस रिपोर्ट में पॉलिसी के मामले में ऐसे कई सिफारिशों का जिक्र है, जिनका असर अगले यूनियन बजट (Union Budget 2023) पर पड़ सकता है। पहला, आईएमएफ का मानना है कि सरकार इस फाइनेंशियल ईयर में फिस्कल डेफिसिट (Fiscal Deficit) के 6.4 फीसदी टारगेट को हासिल कर लेगी। अगले फाइनेंशियल ईयर में इसके घटकर 6.2 फीसदी रहने की उम्मीद है। अगले फाइनेंशियल ईयर में नॉमिनल जीडीपी ग्रोथ 12.4 फीसदी रहने का अनुमान है। इस फाइनेंशियल ईयर में इसके 15.4 फीसदी रहने की उम्मीद है।

2023-24 में कम रहेगी इकोनॉमिक ग्रोथ

अगले फाइनेंशियल ईयर में नॉमिनल जीडीपी ग्रोथ में कमी के अनुमान की दो वजहे हैं। पहला, अगले फाइनेंशियल ईयर में रियल जीडीपी ग्रोथ घटकर 6.8 फीसदी रह जाने की उम्मीद है। इस फाइनेंशियल ईयर में इसके 6.8 फीसदी रहने का अनुमान है। इनफ्लेशन के भी इस फाइनेंशियल ईयर के 6.9 औसत लेवल से घटकर अगले फाइनेंशियल ईयर में 5.1 फीसदी रहने का अनुमान है।

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