बजट 2023 : वित्तमंत्री कैपिटल गेंस के नियमों की कमियां दूर करेंगी, व्हाइट ओक के सीईओ आशीष सोमैया की उम्मीद

Union budget 2023: सरकार ग्रामीण इलाकों पर फोकस बढ़ाएगी। कृषि को आधुनिक बनाने पर जोर होगा ताकि गांव में रहने वाले हर व्यक्ति को रोजगार के लिए शहर जाने की जरूरत नहीं पड़े। साथ ही इंफ्रास्ट्रक्चर पर ज्यादा जोर देने के उपाय करने होंगे

अपडेटेड Jan 02, 2023 पर 12:43 PM
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) 1 फरवरी, 2023 को अगला यूनियन बजट पेश करेंगी। यह 2024 के लोकसभा चुनावों से पहले केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार का अंतिम पूर्ण बजट होगा।

बजट 2023 : कई लोग अगले यूनियन बजट (Union Budget 2023) में पर्सनल इनकम टैक्स के नियमों में बदलाव की उम्मीद कर रहे हैं। लेकिन, व्हाइट ओक कैपिटल मैनेजमेंट के सीईओ आशीष सोमैया की राय इस मामले में अलग है। उन्होंने कहा कि उम्मीद है कि सरकार इस बार कॉर्पोरेट और पर्सनल टैक्स स्ट्रक्चर में किसी तरह का बदलाव नहीं करेगी। अभी टैक्स नियमों में बदलाव करने की जगह उनमें स्थिरता बनाए रखना ज्यादा जरूरी है। मनीकंट्रोल से बातचीत में उन्होंने अगले यूनियन बजट के बारे में विस्तार से चर्चा की। उन्होंने यह भी कहा कि टैक्स एग्जेम्प्शन को इनफ्लेशन से जोड़ना अच्छा कदम होगा। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) 1 फरवरी, 2023 को अगला यूनियन बजट पेश करेंगी। यह 2024 के लोकसभा चुनावों से पहले केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार का अंतिम पूर्ण बजट होगा।

कृषि को आधुनिक बनाने पर होगा फोकस

सोमैया को उम्मीद है कि इस बार बजट में सरकार का फोकस कृषि के आधुनिकीकरण पर होगा। सरकार का मानना है कि कृषि को फायदेमंद बनाने से गांवों से बड़ी संख्या में लोगों के रोजीरोटी के लिए शहर जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। कैपिटल गेंस स्ट्रक्चर के बारे में उन्होंने कहा कि इसके ढांचे को तर्कसंगत बनाने की बहुत चर्चा हो रही है। लिस्टेड या अनिलिस्टेड शेयर, फिक्स्ड इनकम, रियल एस्टेट सहित कई एसेट के कैपिटल गेंस के नियम अभी बहुत जटिल हैं।


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कैपिटल गेंस के नियमों की जटिलताएं दूर होंगी

उन्होंने कहा कि शॉर्ट और लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस की परिभाषा अलग-अलग है। अलग-अलग टाइम पीरियड के लिए टैक्स के रेट्स भी अलग-अलग हैं। चर्चा है कि सरकार इन्हें तर्कसंगत बनाने के बारे में सोच रही है। अगर ऐसा किया जाता है तो यह बहुत अच्छा होगा। लेकिन, अभी इसके बारे में कयास ही लगाए जा रहे हैं। अभी लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस है, सिक्योरिटी ट्रांजेक्शन टैक्स है और डिविडेंड पर टैक्स है। बतौर एक एसेट क्लास इक्विटी पर बहुत ज्यादा टैक्स है।

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सोमैया ने कहा कि एक देश के रूप में हमें ग्रोथ के लिए रिस्क कैपिटल की जरूरत है। नियमों को तर्कसंगत बनाने के साथ ही इक्विटी को टैक्स के लिहाज से एक एसेट क्लास के रूप में देखने की जरूरत है। आज इक्विटी के मुकाबले फिक्स्ड इनकम पर टैक्स के नियम ज्यादा आसान हैं। पिछले कुछ सालों में पॉलिसीज पहले की तुलना में आसान हुई हैं। खासकर जीएसटी के मामले में ऐसा है।

कृषि को फायदमेंद बनाने की जररूरत

अगल बजट में सरकार का फोकस किन सेक्टर पर रहेगा, इसके जवाब में सोमैया ने कहा कि हमारा मानना है कि रूरल सेक्टर, एग्री और एग्री से संबंधित गतिविधियों पर खर्च बढ़ाने की जरूरत है। इंफ्रास्ट्रक्चर पर ज्यादा जोर देने से हमें बेहतर एयरपोर्ट्स, बंदरगाह, सड़कें देखने को मिलेंगी। साथ ही हमें कृषि को आधुनिक बनाने की जरूरत है। इसके लिए रूरल सेक्टर में इनवेस्टमेंट अट्रैक्ट करना होगा। हम गांव में रहने वाले लोगों के लिए कृषि को फशायदेमंद बनाना होगा, क्योंकि हम हर व्यक्ति को गांव से शहर जाते नहीं देख सकते।

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