Budget 2023: निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) के अगले यूनियन बजट (Union Budget 2023) का इतंजार इंडस्ट्री से लेकर आम आदमी तक को है। फाइनेंस मिनिस्टर 1 फरवरी, 2023 को यूनियन बजट पेश करेंगी। यह बजट ऐसे वक्त आ रहा है, जब ग्लोबल इकोनॉमी पर मंदी का खतरा मंडरा रहा है। इधर, इंडियन इकोनॉमी की सेहत अपेक्षाकृत अच्छी है। टैक्स कलेक्शंस में 26 फीसदी उछाल है। रिटेल इनफ्लेशन भी करीब 11 महीने बाद RBI की टारगेट रेंज में आ गया है। कंपनियों के कामकाज में भी सुधार दिख रहा है। ऐसे में वित्त मंत्री के सामने इकोनॉमिक ग्रोथ और फिस्कल कंसॉलिडेशन के उपायों के बीच बैलेंस बनाने का चैलेंज है। निर्मला सीतारमण के पिछले बजटों को देख कर ऐसा लगता है कि सरकार का फोकस इस बजट में भी इकोनॉमिक ग्रोथ बढ़ाने के उपायों पर बना रहेगा। साथ ही वित्त मंत्री फिस्कल कंसॉलिडेशन का रोड मैप भी पेश कर सकती हैं। बजट आने से पहले ऐसी कई जानकारियां हैं, जिन्हें जानना आपके लिए जरूरी है।
संसद का बजट सेशन कब शुरू हो रहा है?
यूनियन बजट 2023 पेश होने से ठीक एक दिन पहले संसद का बजट सत्र शुरू हो रहा है। 31 जनवरी को बजट सत्र शुरू होगा। बजट सत्र का समापन 8 अप्रैल को होने की उम्मीद है।
आर्थिक सर्वेक्षण कब पेश होगा?
बजट सत्र के पहले दिन मुख्य आर्थिक सलाहकार फाइनेंशियल ईयर 2022-23 का आर्थिक सर्वेक्षण पेश करेंगे। इसमें बीते वित्त वर्ष में सरकार की उपलब्धियों का लेखाजेखा होगा। साथ ही तेज इकोनॉमिक ग्रोथ के लिए रिफॉर्म्स के उपायों पर भी चर्चा होगी।
आर्थिक सर्वेक्षण में क्या होता है?
इसमें देश की इकोनॉमी के सामने जो चुनौतियां हैं, उनके बारे में विस्तार से बताया जाएगा। साथ ही उनके सॉल्यूशन पर भी फोकस होगा। मुख्य आर्थिक सलाहकार डॉ वी अनंत नागेश्वरन आर्थिक सर्वे तैयार कर रहे हैं।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू संसद के दोनों सदनों को कब संबोधित करेंगी?
बजट सत्र की शुरुआत 31 जनवरी को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के अभिभाषण से होगा। वह दिन में 11 बजे दोनों सत्रों को संयुक्त रूप से संबोधित करेंगी।
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बजट बनाने की प्रकिया कब शुरू हो जाती है?
आम तौर पर बजट बनाने की प्रक्रिया अक्टूबर में शुरू हो जाती है। वित्त मंत्री इंडस्ट्री से लेकर आम आदमी की बजट से उम्मीदों के बारे में जानने की कोशिश करती हैं। हर सेक्टर के प्रतिनिधि वित्त मंत्री को अपनी मांगों के बारे में बताते हैं।
आसान शब्दों में कहा जाए तो फिस्कल डेफिसिट का मतलब सरकार की आय (Revenue) और खर्च के बीच का अंतर है। सरकार को टैक्स से काफी पैसा मिलता है। इसमें डायरेक्ट और इनडायरेक्ट टैक्स दोनों शामिल हैं। जैसे-इनकम टैक्स, जीएसटी, कस्टम ड्यूटी, एक्साइज ड्यूटी और कई तरह के सेस। इसके अलावा सरकार को सरकारी कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी बेचने, डिविडेंड और इंटरेस्ट से भी इनकम होती है। जब सरकार की इनकम उसके कुल खर्च के मुकाबले कम रहती है तो फिस्कल डेफिसिट की स्थिति बनती है।
सरकार अपनी इनकम से ज्यादा खर्च क्यों करती है?
सरकार के अपनी इनकम से ज्यादा खर्च करने की कई वजहे हैं। वह बुनियादी सुविधाओं पर बड़ी रकम खर्च करती है। सड़क, एयरपोर्ट, बंदरगाह, रेलवे जैसी बुनियादी सुविधाओं में निवेश करने से उद्योग और व्यापार बढ़ाने में मदद मिलती है। इसके अलावा सरकार पर नागरिकों को बुनियादी सुविधाएं देने की भी जिम्मेदारी होती है। इनमें शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली आदि शामिल हैं।