Budget 2024-25: उद्योग चैंबर FICCI के प्रेसिडेंट अनीश शाह ने अगले वित्त वर्ष (2024-25) में जीडीपी ग्रोथ 8 फीसदी रहने की उम्मीद जताई है। शाह महिंद्रा ग्रुप के मैनेजिंग डायरेक्टर भी हैं। उन्होंने कहा कि इंडिया बहुत अच्छी स्थिति में है। हमें इकोनॉमी की रफ्तार बढ़ने के संकेत दिख रहे हैं। अगले वित्त वर्ष में यह रफ्तार 8 फीसदी रह सकती है। इसकी बड़ी वजह यह है कि सरकार पूंजीगत खर्च बढ़ा रही है। इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी ज्यादा पैसे खर्च हो रहे हैं। इसका असर कई तरह से पड़ेगा। प्राइवेट सेक्टर पूंजीगत खर्च के मामले में थोड़ा पीछे दिख रहा था। लेकिन, अब कई सेक्टर में निवेश बढ़ता दिख रहा है। कंपनियां कैपेसिटी बढ़ा रही हैं। आगे प्राइवेट सेक्टर के पूंजीगत खर्च में और इजाफा देखने को मिलेगा। उन्होंने सीएनबीसी-टीवी18 से बातचीत में ये बातें कहीं।
दो थीम का असर इकोनॉमी पर जारी रहेगा
इस वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में इंडियन इकोनॉमी की जीडीपी ग्रोथ 7.6 फीसदी रही। सरकार ने 30 नवंबर को यह डेटा जारी किया था। पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में जीडीपी ग्रोथ 6.2 फीसदी थी। RBI ने दिसंबर में अपनी मॉनेटरी पॉलिसी में इस वित्त वर्ष में जीडीपी ग्रोथ के अनुमान को 6.5 फीसदी से बढ़ाकर 7 फीसदी कर दिया। अनीश शाह ने ऐसे दो बड़ी थीम के बारे में बताया, जिनका असर इंडियन इकोनॉमी के स्ट्रक्चर पर पड़ रहा है। उन्होंने कहा, "पहली थीम मैन्युफैक्चरिंग है जिसके तहत अब विश्वस्तरीय प्रोडक्ट्स बनाए जा रहे हैं। रिसर्च एंड डेवलपमेंट पर काफी फोकस है। इसका मतलब है कि इंडिया में प्रोडक्शन सिर्फ इंडिया के लिए नहीं होगा बल्कि पूरी दुनिया के लिए होगा।"
इंफ्रास्ट्रक्चर पर सरकार का फोकस जारी रहेगा
शाह ने कहा कि दूसरी थीम बहुराष्ट्रीय कंपनियों से जुड़ी है। ये कंपनियां अपनी सप्लाई चेन को डायवर्सिफाय करने के लिए इंडिया में काफी पैसे इनवेस्ट कर रही हैं। उन्होंने कहा कि 1 फरवरी, 2024 को पेश होने वाले बजट (Modi Budget) में पिछले दो बजट में देखा गया ट्रेंड जारी रह सकता है। सरकार ने पिछले दो बजटों में इंफ्रास्ट्रक्चर पर फोकस बढ़ाया है। इंडस्ट्रियल कैपेसिटी बढ़ाने के लिए PLI जैसी स्कीम का ऐलान किया है। बिजनेस के लिए माहौल बेहतर करने के लिए कदम उठाए गए हैं। Nirmala Sitharaman का फोकस आगे भी इन पर बना रहेगा।
पिछले दो बजट में पॉलिटिक्स की जगह इकोनॉमी पर फोकस
उन्होंने कहा कि हमें दो शानदार बजट देखने को मिले। दोनों में पॉलिटिक्स नहीं बल्कि इकोनॉमिक्स पर फोकस किया गया था। हालांकि, राजनीति अपनी जगह पर है लेकिन हमारा मानना है कि पिछले दो बजट में सरकार ने जिस तरह से इकोनॉमिक्स पर फोकस बढ़ाया है, वह आगे भी जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि सरकार को अपने रिफॉर्म्स के एजेंडा के तहत सभी पक्षों को एकजुट करना होगा।