प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तीसरी सरकार की इकोनॉमिक पॉलिसी पर नजरें लगी हैं। उम्मीद है कि एनडीए सरकार ग्रोथ की तेज रफ्तार बनाए रखने के लिए प्राइवेट इनवेस्टमेंट बढ़ाने पर फोकस करेगी। साथ ही उसका फोकस ग्रामीण इलाकों में लोगों की मुश्किलें दूर करने और महंगाई से राहत के उपायों पर भी होगा। सरकार रियल एस्टेट सेक्टर को बढ़ावा देने के भी उपाय कर सकती है। इससे बड़ी संख्या में रोजगार के मौके पैदा होंगे। रियल एस्टेट सेक्टर की तेज ग्रोथ का असर सीमेंट, स्टील, पेंट सहित कई सेक्टर की कंपनियों पर दिखता है।
फिस्कल कंसॉलिडेशन पर गठबंधन सरकार का असर नहीं
सरकार इस वित्त वर्ष में प्रधानमंत्री आवास योजना (PMY) के लिए 80,000 करोड़ रुपये का ऐलोकेशन कर चुकी है। वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) मार्केट को यह संदेश भी देना चाहेंगी कि गठबंधन सरकार की वजह से फिस्कल स्टैबिलिटी बनाए रखने और फिस्कल कंसॉलिडेशन पर सरकार के फोकस पर कोई असर नहीं पड़ेगा। सरकार FY26 तक फिस्कल डेफिसिट को 4.5 फीसदी तक लाना चाहती है।
इलेक्ट्रिक व्हीकल्स पर बना रहेगा सरकार का फोकस
सूत्रों ने बताया है कि सरकार कुछ समय बाद गुजरात की गिफ्ट सिटी में स्थित कंपनियों को बीएसई और एनएसई में लिस्टिंग की इजाजत दे सकती है। इलेक्ट्रिक बसों का इस्तेमाल बढ़ाने के लिए सरकर 70,000 करोड़ रुपये का आवंटन कर सकती है। इसका बड़ा हिस्सा देश में चार्जिंग स्टेशन लगाने पर खर्च होगा। सूत्रों का यह भी कहना है कि सरकार पीएलआई स्कीम में एमएसएमई के लिए बैकवॉर्ड लिकेजेज के उपाय कर सकती है। साथ ही उन सेक्टर्स के लिए इनसेंटिव बढ़ाए जा सकते हैं, जिनमें रोजगार पैदा करने की ज्यादा क्षमता है।
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इस्तेमाल नहीं होने वाले एसेट्स बेचने का प्लान
सरकार के कुछ वर्गों का कहना है कि विनिवेश और एसेट मॉनेटाइजेशन के जरिए वेल्फेयर स्कीम पर होने वाले खर्च में संतुलन लाना होगा। सरकार इस्तेमाल नहीं होने वाले एसेट्स को प्राइवेट कंपनियों को बेच सकती है या लीज पर दे सकती है। रोड कंस्ट्रक्शन, रेलवे स्टेशन डेवलपमेंट, ऑयल एंड गैस पाइपलाइन, माइंस और लैंड बैंक इसके उदाहरण हैं। नेशनल मॉनेटाइजेशन प्रोग्राम के जरिए मार्च 2022 में खत्म हो रहे पहले साल में 97,000 करोड़ रुपये मिले।