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Budget 2024 : नेशनल हाईवे पर पूंजीगत खर्च FY14 में 51000 करोड़ से बढ़कर FY23 में 2.4 लाख करोड़ पहुंच गया

Budget 2024 : केंद्रीय रोड ट्रांसपोर्ट मंत्री नितन गडकरी ने बताया कि रोड मिनिस्ट्री के बजट आवंटन में भी उछाल देखने को मिला है। यह 2023-14 में 31,130 करोड़ रुपये था। यह वित्त वर्ष 2022-23 में बढ़कर 2.7 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया। बजट आवंटन बढ़ाने में देश में सड़कों के नेटवर्क को बढ़ाने में मदद मिली है

MoneyControl Newsअपडेटेड Dec 15, 2023 पर 3:22 PM
Budget 2024 : नेशनल हाईवे पर पूंजीगत खर्च FY14 में 51000 करोड़ से बढ़कर FY23 में 2.4 लाख करोड़ पहुंच गया
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि MoRTH ने कई फ्लैगशिप प्रोजेक्ट्स या सेक्शंस पूरे किए हैं। इन्हें जल्द ट्रैफिक के लिए खोल दिया जाएगा। इससे कनेक्टिविटी बढ़ेगी और लोगों को एक-दूसरी जगहों से आने-जाने में आसानी होगी।

Budget 2024 : पिछले कुछ सालों में नेशनल हाईवे बनाने पर सरकार का खर्च काफी बढ़ा है। यह वित्त वर्ष 2013-14 में 51,000 करोड़ रुपये था, जो वित्त विर्ष 2022-23 में 2.4 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया। यह जानकारी यूनियन रोड ट्रांसपोर्ट एंड हाईवेज (MoRTH) मिनिस्टर नितिन गडकरी (Nitin Gadkari) ने दी है। उन्होंने एक सवाल के जवाब में ससंद को यह जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि रोड मिनिस्ट्री के बजट आवंटन में भी उछाल देखने को मिला है। यह 2023-14 में 31,130 करोड़ रुपये था। यह वित्त वर्ष 2022-23 में बढ़कर 2.7 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया। बजट आवंटन बढ़ाने में देश में सड़कों के नेटवर्क को बढ़ाने में मदद मिली है। मार्च में देश में सड़क नेटवर्क 91,287 किलोमीटर का था। यह बढ़कर अब 1,46,145 किलोमीटर हो गया है। रोड नेटवर्क में वृद्धि के इस डेटा से पता चलता है कि देश में सड़क इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बनाने पर सरकार ने किस तरह फोकस बढ़ाया है।

चार-लेन हाईवेज की लंबाई 250 फीसदी बढ़ी

गडकरी ने बताया कि चार-लेन वाले हाईवेज की लंबाई में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। इनमें हाई-स्पीड कॉरिडोर शामिल हैं। इनमें 250 फीसदी से ज्यादा उछाल है। मार्च 2014 में इसकी लंबाई करीब 18,371 किलोमीटर थी। यह अब बढ़कर 46,179 किलोमीटर पहुंच गई है। दो लेन से कम वाले नेशनल हाईवे की लंबाई घटी है। यह मार्च 2014 में करीब 27,517 किलोमीटर थी। अब यह घटकर 14,870 किलोमीटर रह गई है। अब कुल नेशनल हाईवे नेटवर्क में दो लेन से कम सड़क की हिस्सेदारी घटकर करीब 10 फीसदी रह गई है। इससे पता चलता है कि सरकार का फोकस सड़कों की चौड़ाई बढ़ाकर रोड इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बनाना है।

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