Budget 2024 : बढ़ती युवा आबादी के लिए रोजगार के अवसर सृजित करना वित्त मंत्री के लिए साबित होगा कड़ी परीक्षा

Union budget 2024 : श्रम बाजार में नए प्रवेश करने वाले लोगों को समायोजित करने के लिए भारत को अगले दशक में हर साल लगभग 12 मिलियन नौकरियां पैदा करने की जरूरत होगी

अपडेटेड Jul 06, 2024 पर 10:11 PM
Union budget : वित्त आयोग के अध्यक्ष अरविंद पनगढ़िया ने कुछ दिन पहले दिए एक साक्षात्कार में कहा था कि भारत की प्राथमिक चुनौती केवल नौकरियां पैदा करने के बजाय श्रम की अधिक जरूरत वाले सेक्टरों में पूंजी का निवेश बढ़ाना है

Union budget : सिटीग्रुप ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि भले ही देश ती अर्थव्यवस्था सालाना 7 फीसदी की तेज गति से बढ़े। भारत को अगले दशक में अपने तेजी से बढ़ते वर्कफोर्स के लिए पर्याप्त नौकरियां पैदा करने में कठिन चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। इस रिपोर्ट के मुताबिक भारत को श्रम बाजार में नए प्रवेश करने वाले लोगों को नौकरियां देनें के लिए अगले दशक में सालाना लगभग 1.2 करोड़ नौकरियां पैदा करने की जरूरत होगी। अर्थशास्त्री समीरन चक्रवर्ती और बकर जैदी ने इस रिपोर्ट में कहा है कि 7 फीसदी की ग्रोथ रेट के साथ भारत में हर साल केवल 80-90 लाख नौकरियां ही पैदा होने का अनुमान है।

नौकरियों की गुणवत्ता एक और गंभीर मुद्दा है। आधिकारिक आंकड़ों से पता चलता है कि देश की लगभग 46 फीसदी वर्कफोर्स अभी भी कृषि में कार्यरत है। यह सेक्टर सकल घरेलू उत्पाद में 20 फीसदी से भी कम योगदान देता है। 2023 में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में मिलने वाली नौकरियों का कुल रोजगार में केवल 11.4 फीसदी हिस्सा था। यह 2018 के स्तर से कम है। इससे यह स्पष्ट होता है कि यह सेक्टर महामारी के बाद पूरी तरह से रिकवर नहीं हुआ है।

वित्त आयोग के अध्यक्ष अरविंद पनगढ़िया ने कुछ दिन पहले दिए एक साक्षात्कार में कहा था कि भारत की प्राथमिक चुनौती केवल नौकरियां पैदा करने के बजाय श्रम की अधिक जरूरत वाले सेक्टरों में पूंजी का निवेश बढ़ाना है। उन्होंने बताया था कि बहुत ज्यादा पूंजी ऐसे उद्योगों में लगी हुई है जो अधिक श्रमिकों को काम पर नहीं रखते।


पनगढ़िया ने एक बड़े टीवी चैनल से हुई बातचीत में कहा था कि समस्या उद्योग की संरचना में है, खास तौर पर मैन्युफैक्चरिंग में। मशीनरी, फार्मास्यूटिकल्स और पेट्रोलियम रिफाइनिंग जैसे ऐसे कई सेक्टर हैं जो बहुत ज़्यादा पूंजी की मांग करते हैं लेकिन पर्याप्त संख्या में श्रमिकों को रोजगार नहीं देते। फोकस उन उद्योगों की ओर शिफ्ट करने की जरूर है जो पूंजी की प्रति इकाई अधिक रोजगार पैदा कर सकते हैं।

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पनगढ़िया ने इंडस्ट्रियल लैंडस्केप को पुनर्गठित करने पर जोर दिया ताकि ऐसे क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जा सके जो अधिक रोजगार के अवसर पैदा करते हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि सरकार को उन उद्योगों को प्राथमिकता देनी चाहिए जो पूंजी की प्रति इकाई अधिक श्रमिकों को रोजगार देते हैं।

उन्होंने बताया कि मुख्य समस्या अल्प-रोज़गार की है, जहां कई कर्मचारी ऐसे काम कर रहे हैं जो सिर्फ एक व्यक्ति कर सकता है। इससे प्रति कर्मचारी कम उत्पादकता हासिल होती है। पनगढ़िया ने आगामी बजट को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के लिए एक बड़ी परीक्षा बताया।

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