Budget 2024: लोकसभा चुनाव का समय नजदीक आने के साथ ही सरकार ने निजीकरण (Privatisation) का सिलिसिला रोक दिया है। शायद सरकार को डर है कि चुनावी साल में सराकरी कंपनियों की बिक्री जनता के बीच अच्छा संदेश नहीं देगा। विपक्ष इस मौके का लाभ उठाकर सरकार पर घर के पुश्नैनी गहनों को बेचने का आरोप लगा सकता है। इसकी जगह सरकार ने पहले से स्टॉक मार्केट में सूचीबद्ध कंपनियों में आंशिक हिस्सेदारी बेचने का विकल्प चुना है। इसका नतीजा यह है कि केंद्र सरकार एक बार फिर इस वित्त वर्ष अपने विनिवेश के लक्ष्य (Disinvestment Target) को पूरा करने से चूक सकती है।
भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (BPCL), शिपिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (SCI) और कॉनकॉर जैसी बड़ी कंपनियों के निजीकरण की योजनाएं पहले से ही ठंडे बस्ते में हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि निजीकरण अब कोई बड़ा प्रयास अप्रैल/मई में नई सरकार के गठन के बाद ही हो सकता है।
मौजूदा वित्त वर्ष में सरकार ने विनिवेश के जरिए करीब 51,000 करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा है। हालांकि अभी तक इसका करीब 20 प्रतिशत या 10,049 करोड़ रुपये राशि ही जुटाई जा सकी। इस राशि को आईपीओ, OFS (ऑफर-फॉर-सेल) आदि के जरिए आंशिक हिस्सेदारी बेचकर जुटाया गया है।
इस वित्त वर्ष में SCI, NMDC स्टील लिमिटेड, BEML, HLL लाइफकेयर और IDBI बैंक सहित कई पब्लिक सेक्टर कंपनियों की रणनीतिक बिक्री होने वाली है। हालांकि, इनमें से अधिकतर कंपनियों का ड्यू डिलीजेंस और कोर और गैर-कोर एसेट्स में विभाजन की प्रक्रिया अभी तक पूरी नहीं हुई है। ऐसे में इनके लिए वित्तीय बोलियां मंगाने में देरी हो रही है।
उदाहरण के लिए IDBI बैंक के मामले में, सरकार को जनवरी 2023 में कई एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (EoI) मिले थे, लेकिन बोलीदाताओं को अभी तक सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) से सिक्योरिटी और 'फिट एंड प्रॉपर' मंजूरी नहीं मिली है। ऐसे में IDBI सहित लिस्ट में शामिल बाकी सभी पब्लिक सेक्टर कंपनियों के निजीकरण की प्रक्रिया अगले वित्त वर्ष में खींचने की उम्मीद है।
कुल मिलाकर, लगभग 11 पब्लिक सेक्टर कंपनियां है, जिनके निजीकरण की प्रक्रिया पर DIPAM (डिपार्टमेंट ऑफ इनवेस्टमेंट एंड पब्लिक एसेट मैनेजमेंट) काम कर रहा है। इसके अलावा लिस्ट में 3 और नाम हैं- राष्ट्रीय इस्पात निगम लिमिटेड (RINL), कंटेनर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (CONCOR) और एयर इंडिया एसेट होल्डिंग लिमिटेड (AIAHL)। लेकिन DIPAM ने अभी तक इनके लिए एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (EoI) नहीं मंगाए हैं।
पिछले 10 सालों में केंद्र सरकार ने विनिवेश के जरिए कुल 4.20 लाख करोड़ रुपये जुटाए हैं। इसमें से 3.15 लाख करोड़ रुपये आंशिक हिस्सेदारी की बिक्री से आए हैं। जबकि 69,412 करोड़ रुपये को 10 पब्लिक सेक्टर में कंपनियों में रणनीतिक बिक्री के जरिए जुटाया गया गै। इन कंपनियों में - एचपीसीएल, आरईसी, डीसीआईएल, एचएससीसी, एनपीसीसी, NEEPCO, THDC, कामराजार पोर्ट, एयर इंडिया और NINL शामिल हैं।