Budget 2024: लोकसभा चुनाव का समय नजदीक आने के साथ ही सरकार ने निजीकरण (Privatisation) का सिलिसिला रोक दिया है। शायद सरकार को डर है कि चुनावी साल में सराकरी कंपनियों की बिक्री जनता के बीच अच्छा संदेश नहीं देगा। विपक्ष इस मौके का लाभ उठाकर सरकार पर घर के पुश्नैनी गहनों को बेचने का आरोप लगा सकता है। इसकी जगह सरकार ने पहले से स्टॉक मार्केट में सूचीबद्ध कंपनियों में आंशिक हिस्सेदारी बेचने का विकल्प चुना है। इसका नतीजा यह है कि केंद्र सरकार एक बार फिर इस वित्त वर्ष अपने विनिवेश के लक्ष्य (Disinvestment Target) को पूरा करने से चूक सकती है।
