मुरली ने कहा कि इंश्योरेंस सेक्टर पर जीएसटी की दरों को फिर से देखने की जरूरत है और इसमें सुधार इंश्योरेंस सेक्टर को मदद करेगा। हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम के लिए सेक्शन 80D के तहत कटौती की सीमा को व्यक्तियों के लिए 25,000 रुपये से बढ़ाकर 50,000 रुपये और सीनियर सिटीजन के लिए 50,000 रुपये से बढ़ाकर 75,000 रुपये किया जाना चाहिए। हाल के समय में हेल्थ पर खर्च बढ़ा है, तो इस पर मिलने वाली छूट बढ़ने की जरूरत है। सेक्शन 80D के लाभों को नई टैक्स रीजीम में भी जोड़ने की जरूरत है। अभी नए टैक्स रीजीम में मेडिकल इंश्योरेस प्रीमियम पर टैक्स छूट मिलना चाहिए। इस फायदे के बढ़ने से हेल्थ सर्विस पहले से ज्यादा आसान और सभी के लिए उपलब्ध होगी।