कोविड की महामारी के बाद से रेलवे का रेवेन्यू बढ़ा है। फाइनेंशियल ईयर 2023-24 और इससे पहले के चार सालों में औसत रेवेन्यू ग्रोथ सालाना 8.1 फीसदी रही। यह फाइनेंशियल ईयर 2013-14 से 2018-19 की सालाना 6.4 फीसदी की औसत ग्रोथ से ज्यादा है। इंडियन रेलवे से गुड्स की ढुलाई बढ़ने से रेवेन्यू में इजाफा हुआ है। FY19 से FY24 में वॉल्यूम के लिहाज से फ्रेट ट्रैफिक ग्रोथ 5.3 फीसदी रही। इससे पहले के पांच सालों में यह 3.1 फीसदी थी। कोविड के दौरान पैसेंजर ट्रैफिक में गिरावट आई थी।
फ्रेट ट्रैफिक ग्रोथ में सुस्ती
रेलवे (Railway) के पैसेंजर रेवेन्यू में वृद्धि के पीछे प्रीमियम सेवाओं के लॉन्च का हाथ है। रेलवे ने वंदे भारत जैसी प्रीमियम ट्रेनें शुरू की हैं। इस साल 1 फरवरी को पेश अंतरिम बजट (Interim Budget) में रेल पैसेंजर ट्रैफिक 746.6 करोड़ रहने का अनुमान लगाया गया था। फाइनेंशियल ईयर 2019 में रेलवे से 843.9 करोड़ लोगों के सफर किया था। नई पैसेंजर ट्रेनों के शुरू होने से वॉल्यूम बढ़ सकती है। लेकिन, फ्रेट ट्रैफिक के ग्रोथ रेट में सुस्ती के संकेत है।
ऑपरेटिंग रेशियो में सुधार
FY24 में फ्रेट ट्रैफिक की ग्रोथ 4.4 फीसदी रही, जबकि FY19 से FY24 के दौरान औसत ग्रोथ 5.3 फीसदी थी। चूंकि रेलवे के रेवेन्यू का बड़ा हिस्सा फ्रेट ट्रैफिक से आता है, जिससे इसकी माल ढुलाई सेवाओं की अच्छी ग्रोथ जरूरी है। मजबूत फ्रेट बिजनेस की वजह से कोविड की महामारी के दौरान पैसेंजर ट्रैफिक में आई कमी का कम असर पड़ा। FY22 में रेलवे का ऑपरेटिंग रेशियो 107.4 फीसदी था, जो FY24 में सुधरकर 98.2 फीसदी हो गया। ऑपरेटिंग रेशियो का मतलब है कि हर 100 रुपये कमाने के लिए रेलवे को कितने रुपये खर्च करने पड़ते हैं। यह रेशियो जितना कम होता है, उतना अच्छा माना जाता है।