इस महीने बजट पेश होने के पहले स्टॉक मार्केट ने ऊंचाई के रिकॉर्ड बनाए हैं। स्टॉक मार्केट्स के प्रमुख सूचकांकों सेंसेक्स और निफ्टी में शानदार तेजी आई है। मार्केट का सेंटिमेंट मजबूत है। सवाल है कि क्या बाजार में तेजी बजट के बाद भी जारी रहेगी? कुछ हद तक इसका जवाब मॉर्गन स्टेनली की रिपोर्ट से मिल सकता है।
हर तीन में से दो बार बजट के बाद बाजार गिरा है
ब्रोकरेज फर्म ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि हर तीन बार में से दो बार बजट (Union Budget) के बाद के 30 दिन में गिरा है। अगर बजट से पहले के एक महीने में मार्केट में तेजी आई है तो बजट के बाद मार्केट में गिरावट की संभावना 80 फीसदी बढ़ जाती है। बीते 30 सालों में सिर्फ दो बार बजट से पहले और बाद शेयर बाजार में तेजी देखने को मिली है।
फिस्कल कंसॉलिडेशन की पॉलिसी पर नजर रखने की जरूरत
मॉर्गन स्टेनली ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि निवेशकों को बजट में फिस्कल कंसॉलिडेशन पर नजर रखने की जरूरत है। अगर फिस्कल कंसॉलिडेशन को लेकर सरकार की पॉलिसी बदलती है तो इसका असर स्टॉक मार्केट पर पड़ सकता है। सरकार का फोकस पिछले कुछ समय से फिस्कल कंसॉलिडेशन पर बढ़ा है। इस साल 1 फरवरी को पेश अंतरिम बजट में इसके नतीजें भी दिखे थे। मार्केट को उम्मीद है कि अपनी वित्तीय सेहत मजबूत करने पर सरकार का फोकस जारी रहेगा।
टैक्स में राहत मिलने की उम्मीद
वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण बजट में कम इनकम वाले लोगों के साथ ही मिडिल क्लास पर टैक्स में कमी का ऐलान कर सकती हैं। CII और PHDCCI जैसे प्रमुख उद्योग चैंबर ने सरकार को दोनों पर टैक्स का बोझ घटाने की सलाह दी है। इसका फायदा इकोनॉमी को होगा। एक्सपर्ट्स का कहना है कि बढ़ती महंगाई ने लोगों के लिए बड़ी मुश्किल पैदा कर दी है। अगर उन पर टैक्स का बोझ घटाया जाता है तो उनके हाथ में ज्यादा पैसे बचेंगे। इससे कंजम्प्शन को बढ़ावा मिलेगा।
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इंफ्रास्ट्रक्टर पर जारी रहेगा फोकस
स्टॉक मार्केट्स को बजट में इंफ्रास्ट्रक्चर पर सरकार का फोकस जारी रहने की उम्मीद है। सरकार के इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च बढ़ाने से इकोनॉमी पर कई तरह से असर पड़ता है। इससे रोजगार के मौके बनते हैं जिससे पैसा लोगों के हाथ में पहुंचता है। पिछले कई सालों से सरकार इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च बढ़ा रही है। सरकार के इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च बढ़ाने से इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी कंपनियों को फायदा होगा।