Budget 2024 : वित्तमंत्री Nirmala Sitharaman ने इंडियन इकोनॉमी के बारे में बहुत अहम बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि साल 2047 तक इंडियन इकोनॉमी का 30 लाख करोड़ डॉलर (ट्रिलियन) का लेवल एक कंजरवेटिव अनुमान है। इसका मतलब है कि यह अनुमान बहुत ज्यादा है। वित्तमंत्री ने गुजरात के गांधीनगर में वाइब्रेंट गुजरात प्रोग्राम में यह बात कही। उन्होंने कहा कि इंडिया के विकसित देश बनने में गुजरात एक इंजन की तरह काम करेगा। उन्होंने कहा कि 2027-28 तक हम (इंडिया) दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी इकोनॉमी बन जाएंगे। यह बात प्रधानमत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है। प्रधानमंत्री ने पूरे भरोसे के साथ यह बात कही है। इस तरह 2027-28 तक हमारा दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी इकोनॉमी बनना मुमकिन है। इसका यह भी मतलब है कि तब हमारी इकोनॉमी 5 ट्रिलियन डॉलर से बड़ी हो जाएगी। सीतारमण ने कहा कि मैं पहले भी कह चुकी हूं कि हमारी इकोनॉमी का 2047 तक 30 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचना एक कंजरवेटिव अनुमान है।
इंडिया के विकसित देश बनने में पश्चिमी देशों की भूमिका होगी
वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि इस सदी के मध्य तक इंडिया के एक विकसित देश बनने में पश्चिमी देशों का बड़ा योगदान होगा। उन्होंने कहा, "गुजरात एक ऐसा राज्य है, जो तेजी से आगे बढ़ रहा है। 2011 और 2021 के बीच इस राज्य का कंपाउंडेड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) 12 फीसदी रहा है, जबकि राष्ट्रीय औसत 10.4 फीसदी रहा है। इसलिए हम गुजरात में 2047 तक इंडिया के विजन के बारे में बात कर रहे हैं। मुझे भरोसा है कि चीफ मिनिस्टर के नेतृत्व में गुजरात के लोग उस दिशा (विकसित देश) की दिशा में बढ़ने में सफल होंगे।"
केंद्र और राज्यों का संबंध आपसी सहयोग पर आधारित
केंद्र और राज्यों के संबंध के बारे में वित्तमंत्री ने कहा कि 2014 से सहयोग, प्रतियोगिता और आपस में सहयोग करने वाले राज्यों की सोच रही है। इसके चलते राज्यों में आपस में प्रतियोगिता बढ़ी है। पहले केंद्र और राज्य के बीच के रिश्ते अलग तरह के थे। इसमें केंद्र देने वाला और राज्य लेने वाले थे। लेकिन 2014 से स्थिति बदली है। अब राज्यों के बीच पार्टरनिशिप हो रही है। यह पार्टनरशिप इसलिए ताकि राज्यों की तरक्की हो सके। इसलिए मैं इसे केंद्र और राज्यों के बीच पार्टनरशिप के रूप में देखती हूं। इकोनॉमी के बारे में टिप्पणी करते हुए वित्तमंत्री ने कहा कि इंडिया अब सेमीकंडक्टर्स का इन-हाउस पावर हाउस बनेगा। उन्होंने कहा कि इंडिया में काफी प्रत्यक्ष विदेशी निवेश हो रहा है। अमेरिका में हाई इंटरेस्ट रेट और दूसरी चुनौतियों के बावूजद एफडीआई की रफ्तार अच्छी है।